जयपुर। राजस्थान में शुक्रवार को जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रदेशभर के कृष्ण मंदिरों में दिनभर धार्मिक आयोजनों का सिलसिला चलता रहा। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के प्रकट होने के साथ ही मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठे। भक्तों ने भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हुए आरती और पूजा-अर्चना की। कई प्रमुख मंदिरों में विशेष सजावट, अभिषेक, आतिशबाजी और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
गोविंददेवजी मंदिर में पंचामृत अभिषेक
जयपुर के प्रसिद्ध गोविंददेवजी मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन हुए। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद ठाकुरजी का पंचामृत से अभिषेक किया गया। भगवान के जन्म के समय मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। विशेष पूजा-अर्चना और आरती के बाद भक्तों ने भगवान के दर्शन किए। मंदिर परिसर में जन्माष्टमी को लेकर खास सजावट भी की गई थी।
श्रीनाथजी मंदिर में 21 तोपों की सलामी
राजसमंद के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में भी जन्माष्टमी का भव्य आयोजन हुआ। भगवान श्रीनाथजी के जन्म के अवसर पर परंपरा के अनुसार 21 तोपों की सलामी दी गई। मध्यरात्रि में भगवान के प्राकट्य के साथ ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर जन्माष्टमी का उत्सव मनाया।
सांवलियाजी में 1100 ड्रोन से दिखाई कृष्ण लीला
चित्तौड़गढ़ जिले के प्रसिद्ध सांवलियाजी मंदिर में जन्माष्टमी का आयोजन आकर्षण का केंद्र रहा। यहां करीब 1100 ड्रोन के जरिए आसमान में भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का भव्य प्रदर्शन किया गया। आकाश में ड्रोन से बनी कृष्ण लीला ने श्रद्धालुओं और दर्शकों का ध्यान खींचा। आधुनिक तकनीक और धार्मिक आस्था के इस संगम ने जन्माष्टमी समारोह को खास बना दिया।
रात 12 बजे मंदिरों में गूंजे जयकारे
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म के साथ ही भक्तों ने ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे लगाए। मंदिरों में घंटियां और शंखनाद गूंजे। कई स्थानों पर जन्म के बाद भगवान को झूले में विराजमान कर पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने व्रत खोलकर प्रसाद ग्रहण किया और परिवार के साथ जन्माष्टमी का पर्व मनाया।
राजस्थान में आस्था और उत्सव का संगम
जयपुर के गोविंददेवजी मंदिर से लेकर नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर और सांवलियाजी तक जन्माष्टमी के अलग-अलग आयोजनों ने प्रदेश में धार्मिक उत्सव का माहौल बना दिया। कहीं पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान हुए तो कहीं आधुनिक तकनीक के जरिए कृष्ण की लीलाओं को दर्शाया गया।



