Saturday, September 5, 2026
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इसबगोल टैक्स विवाद: गुजरात में 0% तो राजस्थान में 5% टैक्स, व्यापारियों ने उठाए सवाल…57वीं GST काउंसिल में मुद्दा उठाने की मांग

राजस्थान के इसबगोल कारोबार पर GST की अलग-अलग दरों को लेकर विवाद बढ़ गया है। गुजरात में प्राकृतिक और कच्चे इसबगोल बीज पर 0% GST, जबकि राजस्थान में मंडियों और गोदामों में रखे बीज पर 5% GST लगाए जाने का दावा है। राजस्थान इसबगोल प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने 12 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली 57वीं GST काउंसिल की बैठक में मामला उठाने और पूरे देश में कच्चे इसबगोल पर समान 0% GST लागू करने की मांग की है।

जयपुर। राजस्थान के प्रमुख कृषि उत्पादों में शामिल इसबगोल को लेकर GST की अलग-अलग दरों ने किसानों, व्यापारियों और प्रोसेसिंग इकाइयों की चिंता बढ़ा दी है। राजस्थान इसबगोल प्रोसेसर्स एसोसिएशन का कहना है कि गुजरात में प्राकृतिक और कच्चे इसबगोल बीज पर 0% GST, जबकि राजस्थान में मंडियों और गोदामों में रखे इसबगोल बीज पर 5% GST लगाया जा रहा है। एसोसिएशन ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार से आगामी 57वीं GST काउंसिल की बैठक में मुद्दा उठाने की मांग की है। बैठक 12 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित है। एसोसिएशन की मांग है कि प्राकृतिक, कच्चे और बिना प्रसंस्करण वाले इसबगोल बीज पर पूरे देश में एक समान 0% GST लागू किया जाए।

गुजरात और राजस्थान में GST की अलग-अलग दरों पर सवाल

राजस्थान इसबगोल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप कुमार के अनुसार, गुजरात AAR के 29 मई 2026 के फैसले में प्राकृतिक, कच्चे और बिना प्रसंस्करण वाले इसबगोल बीज को ताजा उत्पाद मानते हुए शून्य GST लागू किया गया है। वहीं एसोसिएशन के मुताबिक राजस्थान AAR के 27 जुलाई 2026 के आदेश में मंडियों और APMC में नीलामी के लिए आने वाले तथा गोदामों और शेड में रखे इसबगोल बीज को प्रोसेस्ड ड्राई उत्पाद मानते हुए 5% GST लगाया गया है। एसोसिएशन का दावा है कि दोनों राज्यों में अलग-अलग टैक्स व्यवस्था होने से राजस्थान की मंडियों में इसबगोल की खरीद और नीलामी प्रभावित हो रही है।

नमी ग्रहण करता है इसबगोल का बीज: एसोसिएशन

एसोसिएशन के महासचिव विभोर गोयल ने कहा कि इसबगोल का बीज वातावरण से स्वाभाविक रूप से नमी ग्रहण करता है। ऐसे में केवल मंडी या गोदाम में रखे जाने के आधार पर उसे सुखाया हुआ या प्रोसेस्ड उत्पाद नहीं माना जाना चाहिए। एसोसिएशन का तर्क है कि प्राकृतिक और कच्चे बीज की प्रकृति दोनों राज्यों में समान है, इसलिए GST की दर भी समान होनी चाहिए।

90% तक इसबगोल निर्यात होने का दावा

एसोसिएशन के अनुसार राजस्थान से करीब 90% इसबगोल का निर्यात किया जाता है। निर्यातकों को GST रिफंड का प्रावधान होने के बावजूद रिफंड की प्रक्रिया में वर्किंग कैपिटल फंस जाती है। एसोसिएशन का कहना है कि इससे प्रोसेसिंग इकाइयों का कैश फ्लो प्रभावित हो रहा है और कारोबार की लागत बढ़ रही है।

पूरे देश में 0% GST की मांग

राजस्थान इसबगोल प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने GST काउंसिल से APMC के माध्यम से खरीदे जाने वाले प्राकृतिक और कच्चे इसबगोल बीज पर देशभर में समान रूप से 0% GST लागू करने की सिफारिश करने की मांग की है। इसके साथ ही एसोसिएशन ने मांग की है कि GST काउंसिल की ओर से स्पष्टता आने तक राजस्थान GST विभाग AAR के विवादित फैसले को लागू न करे और प्रदेश की मंडियों में इसबगोल की खरीद एवं नीलामी व्यवस्था को सामान्य किया जाए।

गुजरात जाने का बढ़ सकता है खतरा

एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि राजस्थान में 5% GST की व्यवस्था जारी रहने पर इसबगोल की प्रोसेसिंग से जुड़ी इकाइयों के गुजरात जाने का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहने की आशंका जताई गई है। एसोसिएशन के मुताबिक इससे किसानों की खरीद, मंडियों, परिवहन, भंडारण और स्थानीय रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। राजस्थान देश के इसबगोल उत्पादन में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। ऐसे में उद्योग की मांग है कि प्राकृतिक और कच्चे इसबगोल के लिए पूरे देश में एक समान GST व्यवस्था लागू की जाए, ताकि किसानों और प्रोसेसिंग उद्योग को समान कारोबारी माहौल मिल सके।

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