Saturday, September 5, 2026
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राजस्थान निकाय चुनाव 2026: सवा लाख पोस्टर-बैनर हटाए गए, खर्च सीमा उल्लंघन पर प्रत्याशियों के खिलाफ होगी बड़ी कार्रवाई

राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में प्रचार सामग्री को लेकर चुनाव आयोग सख्त हो गया है। प्रदेश में अब तक सवा लाख से ज्यादा अवैध पोस्टर, बैनर और होर्डिंग हटाए जा चुके हैं। सार्वजनिक स्थलों पर प्रचार सामग्री लगाने का खर्च प्रत्याशी के चुनावी खर्च में जोड़ा जाएगा। निर्धारित खर्च सीमा पार होने पर अगले चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है। प्रदेश के 41 जिलों के 10,245 वार्डों में 38,891 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

जयपुर। राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के लिए प्रचार सामग्री एवं चुनावी खर्च के नियमों को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। सार्वजनिक स्थलों पर लगाए जा रहे पोस्टर, बैनर और होर्डिंग को लेकर आयोग ने स्पष्ट किया है कि इनका खर्च संबंधित प्रत्याशी के कुल चुनावी खर्च में जोड़ा जाएगा। यदि किसी प्रत्याशी का चुनावी खर्च निर्धारित सीमा से अधिक पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है और भविष्य में चुनाव लड़ने पर भी रोक लग सकती है।

सवा लाख से ज्यादा पोस्टर-बैनर हटाए

प्रदेश में 19 अगस्त को निकाय चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों ने सार्वजनिक स्थानों से अवैध पोस्टर, बैनर और होर्डिंग हटाने का अभियान शुरू किया। आयोग के अनुसार, बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कई प्रत्याशी और राजनीतिक दल सड़कों, गलियों, चौराहों और सरकारी भवनों पर प्रचार सामग्री लगा रहे हैं। अब तक प्रदेशभर में सवा लाख से अधिक पोस्टर, बैनर और होर्डिंग हटाए जा चुके हैं। आयोग ने इसे आदर्श आचार संहिता और राजस्थान संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 2006 का उल्लंघन बताया है।

प्रचार सामग्री का खर्च भी चुनावी खर्च में जुड़ेगा

निकाय चुनाव में प्रत्याशियों को अपने प्रचार का पूरा हिसाब देना होगा। पोस्टर, बैनर, होर्डिंग, रैली, जनसंपर्क और सोशल मीडिया अभियान पर होने वाला खर्च निर्धारित सीमा के भीतर रखना होगा। चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार प्रत्याशियों को चुनाव परिणाम घोषित होने के 15 दिन के भीतर चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करना होगा। यदि खर्च का विवरण निर्धारित सीमा से अधिक पाया जाता है तो प्रत्याशी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इस बार कितनी है चुनावी खर्च की सीमा?

राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार निकाय चुनाव में प्रत्याशियों की खर्च सीमा बढ़ाई है।

  • नगर निगम पार्षद: 2.50 लाख से बढ़ाकर 3.50 लाख रुपये
  • नगर परिषद पार्षद: 1.50 लाख से बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये
  • नगरपालिका पार्षद: 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये

यानी नगर निगम और नगर परिषद के प्रत्याशियों के लिए खर्च सीमा में 1 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जबकि नगरपालिका प्रत्याशियों की सीमा में 50 हजार रुपये की वृद्धि हुई है।

प्रत्याशियों को जारी होंगे नोटिस

चुनाव आयोग ने व्यय पर्यवेक्षकों और जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों को नोटिस जारी कर सख्त चेतावनी दी जाए। जिला प्रशासन, पुलिस, व्यय पर्यवेक्षक और नगर निकाय अधिकारियों के बीच समन्वय बनाकर अवैध प्रचार सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

बिजली के खंभों और सरकारी दीवारों पर प्रचार प्रतिबंधित

चुनाव के दौरान बिजली के खंभों, सरकारी भवनों, सरकारी दीवारों, सड़कों और चौराहों पर किसी भी राजनीतिक दल या प्रत्याशी की प्रचार सामग्री लगाना प्रतिबंधित है। इसी तरह निजी मकान या दीवार पर भी मालिक की लिखित अनुमति के बिना पोस्टर, बैनर या झंडा लगाना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। एडवोकेट प्रतीक कासलीवाल के अनुसार राजस्थान संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 2006 की धारा 3 के तहत बिना अनुमति सार्वजनिक या निजी संपत्ति को पोस्टर, बैनर या अन्य प्रचार सामग्री से खराब करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उनके अनुसार पहली बार उल्लंघन पर 5 हजार रुपये तक का जुर्माना और एक माह तक की जेल हो सकती है। दोबारा गलती करने पर जुर्माना बढ़कर 10 हजार रुपये तक हो सकता है।

38,891 प्रत्याशी मैदान में

राजस्थान के 41 जिलों के 10,245 वार्डों में अब कुल 38,891 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। स्क्रूटनी के दौरान तकनीकी खामियों के कारण 17,137 नामांकन पत्र खारिज किए गए, जबकि 10,112 प्रत्याशियों ने अपने नामांकन वापस ले लिए। इस बार अब तक 77 प्रत्याशी निर्विरोध पार्षद चुने जा चुके हैं। पिछली बार 196 निकायों में करीब 27 हजार प्रत्याशी मैदान में थे, जबकि इस बार प्रत्याशियों की संख्या काफी अधिक है।

प्रत्याशियों के लिए बढ़ी मुश्किलें

निकाय चुनाव में प्रचार का दौर तेज होने के साथ ही आयोग की निगरानी भी बढ़ गई है। प्रत्याशियों को अब प्रचार सामग्री लगाने से लेकर उसके खर्च तक का पूरा हिसाब रखना होगा। सार्वजनिक संपत्ति को गंदा करने या चुनावी खर्च सीमा पार करने की स्थिति में कार्रवाई की आशंका के चलते प्रत्याशियों के सामने प्रचार अभियान को नियमों के दायरे में रखने की चुनौती बढ़ गई है।

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