JJM Scam Mahesh Joshi News: राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में पूर्व जलदाय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश जोशी को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उनकी गिरफ्तारी को गैर-कानूनी बताते हुए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत के इस फैसले से साफ है कि महेश जोशी को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा.
याचिका में कही गई थी ये बात
मामले की सुनवाई जस्टिस उमाशंकर व्यास और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने की. याचिका महेश जोशी के पुत्र रोहित जोशी की ओर से दायर की गई थी, जिसमें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमन अग्रवाल और नेहा गोयल ने अदालत में तर्क दिया कि 7 मई को एसीबी की विशेष जांच टीम ने महेश जोशी को जयपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था, लेकिन गिरफ्तारी के दौरान परिजनों को आवश्यक लिखित सूचना नहीं दी गई. उन्होंने नई आपराधिक प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों का हवाला देते हुए दावा किया कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी नियमों का पालन नहीं किया गया, इसलिए इसे अवैध माना जाना चाहिए.
महाधिवक्ता ने किया ACB कार्रवाई का बचाव
हालांकि राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद और अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने एसीबी की कार्रवाई का बचाव किया. उन्होंने अदालत के समक्ष केस डायरी और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कहा कि गिरफ्तारी पूरी तरह वैधानिक और पारदर्शी तरीके से की गई थी. गिरफ्तारी के समय परिवार के सदस्य मौके पर मौजूद थे और उन्हें कार्रवाई की पूरी जानकारी थी। इसके अलावा, रोहित जोशी को भी फोन के माध्यम से लगातार सूचना दी गई थी. हाईकोर्ट ने सरकारी पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया. अदालत ने माना कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में कोई ऐसी गंभीर त्रुटि नहीं हुई, जिसके आधार पर इसे अवैध ठहराया जा सके.
पहले ED भी कर चुकी मामले में गिरफ्तार
गौरतलब है कि जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में एसीबी ने 7 मई को महेश जोशी को गिरफ्तार किया था. बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से पहले पुलिस रिमांड और फिर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया. इससे पहले इसी मामले में ED (ईडी) भी उन्हें गिरफ्तार कर चुकी है. उस मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है.
यह पूरा मामला वर्ष 2021 में जल जीवन मिशन के तहत कथित रूप से फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्रों के आधार पर करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल करने से जुड़ा है. एसीबी और ईडी दोनों एजेंसियां इस मामले की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही हैं. हाईकोर्ट के ताजा फैसले को जांच एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है.
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