Tuesday, June 23, 2026
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8 साल बाद ईरान को मिली बड़ी छूट, अमेरिका भी राजी, भारत को सस्ते तेल और व्यापार में मिल सकता है बड़ा फायदा

अमेरिका द्वारा ईरान को 60 दिनों की अस्थायी छूट दिए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरानी तेल की वापसी का रास्ता खुल गया है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है। WTI और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी नरमी दर्ज की गई है।

Iran Oil Sanctions Relief : नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सोमवार को स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हुई शांति वार्ता का पहला दौर सकारात्मक रहा। इसी के बाद अमेरिका ने ईरान को बड़ी राहत देते हुए 60 दिनों का अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन, परिवहन और बिक्री से जुड़े कुछ लेनदेन की अनुमति दी गई है। यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका ने वर्ष 2018 में ईरानी तेल निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। नए लाइसेंस के बाद ईरानी कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में वापसी का रास्ता खुल गया है। माना जा रहा है कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने के साथ तेल की आपूर्ति भी बेहतर हो सकती है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और तेल की कीमतों में संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना भी इस फैसले का प्रमुख कारण है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने होर्मुज मार्ग से तेल टैंकरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर सहमति जताई है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को भी ईरान में निरीक्षण और निगरानी गतिविधियों की अनुमति देने पर सहमति बनी है, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।

ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को मिली बड़ी अस्थायी राहत

अमेरिका द्वारा जारी किया गया यह अस्थायी लाइसेंस ईरान से जुड़े पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स के उत्पादन, रिफाइनिंग, वितरण, परिवहन और बिक्री से संबंधित गतिविधियों को सीमित अवधि के लिए मंजूरी देता है। यह छूट 21 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगी। नए ढांचे के तहत आवश्यक होने पर ईरानी मूल के कच्चे तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के अमेरिका में आयात की भी अनुमति दी गई है। हालांकि, अमेरिकी वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल ईरान से जुड़े लेनदेन पर लागू होगी। उत्तर कोरिया और क्यूबा से संबंधित किसी भी व्यापारिक गतिविधि को इसमें शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि दोनों देश अलग-अलग अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्थाओं के तहत आते हैं।

कच्चे तेल में गिरावट, वैश्विक बाजार को मिली राहत

ईरान से अतिरिक्त कच्चे तेल की आपूर्ति की संभावना ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर तत्काल असर डाला है। निवेशकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड मार्च की शुरुआत के बाद पहली बार 74 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया। इसमें 2.7 प्रतिशत की गिरावट आई और कीमत 73.82 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, ब्रेंट क्रूड भी 2.8 प्रतिशत टूटकर 78.29 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी तेल निर्यात की संभावित वापसी से वैश्विक आपूर्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। इससे मध्य पूर्व में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं कम होंगी और ऊर्जा बाजार को संतुलन मिलेगा। यही वजह है कि निवेशकों ने इस घटनाक्रम को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।

ईरान को छूट, भारत को बड़ा फायदा

ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल और प्राकृतिक गैस भंडार वाले देशों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरानी तेल की वापसी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, रिफाइनरी संचालन और कच्चे तेल की कीमतों पर बड़ा असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत ईरान से तेल आयात बढ़ाता है, तो उसे अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर कच्चा तेल मिल सकता है। इससे देश की तेल आयात लागत कम होगी और ऊर्जा क्षेत्र को राहत मिलेगी। लंबे समय में इसका फायदा आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है, जिससे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में कटौती की संभावना बढ़ जाएगी।

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Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
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