Iran Israel War: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है. इजराइल और ईरान ने सोमवार तड़के एक-दूसरे पर जवाबी हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका गहरा गई है. संघर्षविराम लागू होने के 2 महीने बाद दोनों देशों के बीच यह अब तक की सबसे गंभीर सैन्य झड़प मानी जा रही है.
इजराइल और ईरान में सुनाई दी मिसाइलों की गूंज
ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों के जवाब में इजराइल ने तेहरान समेत ईरान के मध्य और पश्चिमी इलाकों में कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए. इसके बाद ईरान ने भी पलटवार करते हुए इजराइल पर मिसाइलें दागीं. इजराइल की वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन मध्य इजराइल में धमाकों की आवाजें सुनी गईं. ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार तेहरान, इस्फहान, तबरीज और करज जैसे प्रमुख शहरों में विस्फोट हुए.
ईरान में पेट्रोकेमिकल संयंत्र को बनाया निशाना
अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों फार्स और मेहर ने खबर में बताया कि इजराइली हमलों में खुजेस्तान प्रांत के माहशहर कस्बे स्थित एक पेट्रोकेमिकल संयंत्र को निशाना बनाया गया. हालांकि, नुकसान के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई.
बाद में इजराइली सेना ने भी पेट्रोकेमिकल संयंत्र पर किए गए इस हमले की पुष्टि कर दी.
अमेरिका पर भड़का ईरान
ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए अमेरिका को भी जिम्मेदार ठहराया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि इजराइल अमेरिका की जानकारी और समर्थन के बिना ऐसी कार्रवाई नहीं कर सकता. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो उसके परिणामों की जिम्मेदारी भी अमेरिका की होगी.
हूती विद्रोही भी कूदे मैदान में
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी इस संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाने के संकेत दिए हैं. हूतियों ने यरुशलम पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए लाल सागर में इजराइल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है. इससे वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी खतरा बढ़ गया है.
ट्रंप ने नेतन्याहू को दी हमले रोकने की सलाह
अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन करके ईरानी मिसाइल हमले का तुरंत जवाब न देने की सलाह दी थी. ट्रंप को विश्वास था कि नेतन्याहू हमले रोकने के लिए तैयार हो गए हैं. हालांकि इसके बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव जारी रहा.
युद्ध को 100 दिन हुए पूरे
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था और सोमवार को इसके 100 दिन पूरे हो रहे हैं. यह युद्ध 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था जब इजराइल व अमेरिका ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और ईरान के अन्य शीर्ष नेताओं की हत्या कर दी थी. अप्रैल में हुए संघर्षविराम के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे अब भी विवाद की जड़ बने हुए हैं.
जानकारों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह संघर्ष केवल इजराइल और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है. इससे वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ सकता है.
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