जयपुर। राजस्थान सरकार की राजस्व प्राप्तियों में चालू वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य ने इस अवधि में ₹46 हजार करोड़ से अधिक का राजस्व संग्रह करते हुए वार्षिक राजस्व लक्ष्य का 24.05 प्रतिशत हासिल कर लिया है। पिछले वर्ष की तुलना में राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों में 11.69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
राजस्व संग्रह की समीक्षा के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न विभागों में आय में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। सबसे अधिक बढ़ोतरी यूडीएच विभाग में दर्ज की गई, जहां राजस्व में 95.34 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। इसके अलावा पेट्रोलियम राजस्व में 34.03 प्रतिशत, पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग की आय में 28.89 प्रतिशत, खान विभाग के राजस्व में 17.93 प्रतिशत तथा परिवहन विभाग की आय में 13.58 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
इसी तरह राज्य के प्रमुख कर स्रोतों में भी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। जीएसटी संग्रह में 9.54 प्रतिशत और आबकारी विभाग के राजस्व में 7.54 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सरकार का मानना है कि कर संग्रह में सुधार, डिजिटल निगरानी और कर अनुपालन को बढ़ावा देने के कारण राजस्व प्राप्तियों में लगातार वृद्धि हो रही है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को कर चोरी के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना भी सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में बताया गया कि कर चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक 63 फर्जी फर्मों की पहचान की गई है। इन फर्मों के माध्यम से किए जा रहे ₹259.71 करोड़ के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट को रोकने में सफलता मिली है। अधिकारियों को ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव ने उच्च मूल्य वाले मामलों की विशेष निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ऑडिट प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा सभी राजस्व विभागों के लिए एकीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित करने के निर्देश भी दिए। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से कर संग्रह प्रणाली अधिक पारदर्शी होगी और राजस्व में और वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी।



