जयपुर। प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में अलवर के निजी निशु हॉस्पिटल में अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा प्रसूता की डिलीवरी कराने के मामले को गंभीर मानते हुए अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही लापरवाही बरतने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए।
बैठक में बताया गया कि अलवर के नंगला रायसिस स्थित निजी निशु हॉस्पिटल में चिकित्सक की अनुपस्थिति में नर्सिंग कर्मी द्वारा प्रसूता की डिलीवरी कराई गई थी। इस घटना में प्रसूता अंजुम की मृत्यु हो गई थी। मामले की जांच में अनियमितताएं सामने आने पर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करते हुए उसकी सभी गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अस्पताल को सील कर दिया गया है। प्रमुख शासन सचिव ने अस्पताल संचालक डॉ. भुवनेश कुमार शर्मा के खिलाफ मेडिकल काउंसिल तथा संबंधित नर्सिंग कर्मी रफीकन बानो के खिलाफ नर्सिंग काउंसिल को भी कार्रवाई के लिए पत्र भेजने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समीक्षा बैठक के दौरान गायत्री राठौड़ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर में गर्भवती महिलाओं की एएनसी से जुड़े सभी आंकड़े समय पर और सही तरीके से पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर पहचान और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। उन्होंने संयुक्त निदेशकों, पीएमओ, सीएमएचओ और मेडिकल कॉलेजों के अधिकारियों को एचआरपी मामलों में विशेष संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
अजमेर संभाग में ऐसे मामलों में लापरवाही मिलने पर संबंधित संभागीय संयुक्त निदेशक को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध बायो मेडिकल उपकरणों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अनुपयोगी, अतिरिक्त या मरम्मत योग्य उपकरणों का विवरण ई-उपकरण सॉफ्टवेयर पर अपडेट किया जाए तथा मरम्मत योग्य उपकरणों को शीघ्र ठीक कर मरीजों की सेवा में लगाया जाए। इसके अलावा अस्पताल भवनों और स्वास्थ्य परिसरों की स्थिति की समीक्षा करते हुए प्रमुख शासन सचिव ने जिला कलेक्टरों के सहयोग से मरम्मत योग्य भवनों की पहचान करने, प्राथमिकता के आधार पर सुधार कार्य कराने तथा जर्जर एवं दुर्घटना संभावित भवनों में आमजन के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए।



