नई दिल्ली। अमेरिका की ओर से ईरानी तेल पर सीमित अवधि के लिए प्रतिबंधों में राहत दिए जाने के बाद भारतीय रिफाइनरियों को एक बार फिर ईरान से कच्चा तेल खरीदने के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गए हैं। बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कई अंतरराष्ट्रीय बिचौलियों के साथ-साथ ईरान की सरकारी तेल कंपनी भी भारतीय कंपनियों से संपर्क कर रियायती दरों पर तेल की आपूर्ति की पेशकश कर रही है।
बताया जा रहा है कि ईरानी कच्चा तेल अन्य क्षेत्रीय ग्रेड की तुलना में प्रति बैरल कुछ डॉलर कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा सकता है। कम कीमत और अपेक्षाकृत कम समुद्री दूरी के कारण यह भारतीय रिफाइनरियों के लिए आर्थिक रूप से आकर्षक विकल्प माना जा रहा है। हालांकि, फिलहाल अधिकांश कंपनियां किसी जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय स्थिति का आकलन कर रही हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि भारतीय रिफाइनरियों ने पहले से ही अगस्त तक के लिए विभिन्न देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति के अनुबंध कर रखे हैं। ऐसे में तुरंत बड़े पैमाने पर ईरानी तेल खरीदना आसान नहीं होगा। इसके अलावा, भुगतान व्यवस्था, बैंकिंग चैनलों, बीमा और शिपिंग से जुड़े कई व्यावहारिक पहलुओं पर भी स्पष्टता का इंतजार किया जा रहा है।
इस बीच, ईरान के पेट्रोलियम मंत्री की भारत यात्रा ने दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों को लेकर चर्चाओं को गति दी है। दोनों पक्षों के बीच कच्चे तेल के अलावा एलपीजी आपूर्ति और ऊर्जा सहयोग के अन्य संभावित क्षेत्रों पर भी बातचीत हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भुगतान और वित्तीय लेनदेन से जुड़े मुद्दों का समाधान निकलता है तो भविष्य में दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
भारत वर्ष 2019 तक ईरानी कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद आयात लगभग पूरी तरह बंद हो गया था। अब सीमित अवधि की राहत मिलने से एक बार फिर ईरानी तेल भारतीय बाजार की चर्चा में है। हालांकि, उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि दीर्घकालिक नीति स्पष्ट होने तक भारतीय रिफाइनरियां सतर्क रुख अपनाए रखेंगी और किसी भी बड़े आयात संबंधी निर्णय से पहले सभी व्यावसायिक और रणनीतिक पहलुओं का मूल्यांकन करेंगी।



