चेन्नई। पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नया विवाद सामने आया है। समुद्री परिवहन के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल इस जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन को लेकर ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों के बीच मतभेद उभर आए हैं। इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
हाल के दिनों में सुरक्षा कारणों से कई व्यावसायिक जहाजों ने अपने पारंपरिक मार्गों में बदलाव किया है। जहाज संचालकों का कहना है कि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए सुरक्षित मार्ग अपनाना आवश्यक हो गया है। दूसरी ओर, ईरान का दावा है कि उसके क्षेत्रीय जल में प्रवेश करने वाले जहाजों को निर्धारित समुद्री नियमों का पालन करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डाल सकता है। युद्धविराम के बाद उम्मीद की जा रही थी कि समुद्री यातायात सामान्य हो जाएगा, लेकिन नए विवाद ने शिपिंग कंपनियों और बीमा क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और स्थापित नौवहन नियमों का पालन करने की अपील की है। उनका कहना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक व्यापार के हित में है और किसी भी तरह का टकराव आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह विवाद लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लागत भी बढ़ सकती है। कई देशों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और क्षेत्र में अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
फिलहाल युद्धविराम कायम है, लेकिन समुद्री मार्गों को लेकर पैदा हुआ नया विवाद यह संकेत देता है कि क्षेत्र में स्थायी शांति और सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी समय लग सकता है। आने वाले दिनों में संबंधित देशों के रुख और कूटनीतिक प्रयासों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।



