नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और जियो प्लेटफॉर्म्स के संभावित आईपीओ को लेकर निवेशकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। दोनों कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों की अग्रणी संस्थाएं हैं, इसलिए बाजार में इनके शेयरों को लेकर काफी उम्मीदें हैं। हालांकि बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को केवल नाम और लोकप्रियता देखकर निवेश करने से बचने की सलाह दे रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में भारत में आईपीओ बाजार ने तेजी से विस्तार किया है। कई कंपनियों ने रिकॉर्ड रकम जुटाई और अधिकांश इश्यू को निवेशकों का शानदार प्रतिसाद भी मिला। इसके बावजूद यह भी देखने को मिला कि जिन कंपनियों के शेयर लिस्टिंग के दिन अच्छी बढ़त के साथ खुले, उनमें से कई बाद के महीनों में अपने लिस्टिंग स्तर से नीचे कारोबार करने लगे। इससे साफ है कि लिस्टिंग पर मिलने वाला फायदा और लंबी अवधि का रिटर्न हमेशा एक जैसा नहीं होता। विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा निवेशक अक्सर ग्रे मार्केट प्रीमियम, ओवरसब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग गेन की चर्चाओं से प्रभावित होकर निवेश का फैसला कर लेते हैं, जबकि कंपनी की वास्तविक वैल्यूएशन, कारोबार की संभावनाओं और भविष्य की कमाई पर अपेक्षित ध्यान नहीं देते।
उनका मानना है कि किसी भी आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी के बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति और मूल्यांकन का गहराई से अध्ययन जरूरी है। एनएसई और जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित आईपीओ की संरचना भी अलग-अलग है। एनएसई का इश्यू मुख्य रूप से ऑफर फॉर सेल आधारित होने की संभावना है, जिसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। दूसरी ओर जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ मुख्य रूप से फ्रेश इश्यू हो सकता है, जिससे जुटाई गई पूंजी का उपयोग कंपनी अपने विस्तार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की परियोजनाओं में करेगी। बाजार जानकारों का मानना है कि दोनों कंपनियां मजबूत कारोबारी आधार और लाभप्रद मॉडल के साथ बाजार में उतर रही हैं, लेकिन किसी भी आईपीओ की सफलता केवल कंपनी की लोकप्रियता से तय नहीं होती।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होता है कि शेयर किस मूल्य पर निवेशकों को पेश किया जा रहा है और उस कीमत पर भविष्य की विकास संभावनाएं कितनी पहले से शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को आईपीओ को लॉटरी या त्वरित कमाई का जरिया मानने के बजाय दीर्घकालिक निवेश के नजरिए से देखना चाहिए। किसी भी कंपनी का वास्तविक मूल्यांकन लिस्टिंग के पहले दिन नहीं, बल्कि आने वाले कई तिमाहियों के प्रदर्शन, आय वृद्धि और बाजार की धारणा के आधार पर तय होता है। ऐसे में केवल शुरुआती उत्साह के बजाय सोच-समझकर लिया गया निवेश निर्णय ही लंबे समय में बेहतर रिटर्न दे सकता है।



