जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निकाय चुनावों की प्रक्रिया और प्रदेश में सूखे की स्थिति को लेकर भजनलाल सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने निकाय चुनावों में परिसीमन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पुलिस प्रशासन पर दबाव में काम करने के आरोप लगाए। वहीं, प्रदेश के कई जिलों में सूखे और पानी की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जल्द राहत कार्य शुरू करने की मांग की। जयपुर स्थित अपने सरकारी आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने कहा कि चुनाव में हार-जीत लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं और पुलिस की भूमिका चिंता का विषय हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस अधिकारियों ने भी दबाव में काम करने की बात कही है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस ने शुरू की तैयारी
गहलोत ने कहा कि आगामी पंचायत चुनावों के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संभाग, जिला और विधानसभा स्तर पर कमेटियां गठित कर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि निकाय चुनावों के दौरान वार्डों के परिसीमन में असमानता बरती गई। उनके मुताबिक, कुछ वार्डों में मतदाताओं की संख्या बहुत कम है, जबकि दूसरे वार्डों में यह हजारों तक पहुंच गई है। गहलोत ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक बताते हुए परिसीमन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनावों के दौरान बाड़ेबंदी और धनबल के इस्तेमाल को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जनता इन मुद्दों पर नजर रख रही है और समय आने पर अपना जवाब देगी।
मुख्यमंत्री पर गलत बयान देने का आरोप
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बयानों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन से जुड़े सवालों का उचित जवाब देने के बजाय वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी, राजेंद्र राठौड़ और अरुण चतुर्वेदी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि परिसीमन की प्रक्रिया के दौरान वार्डों के निर्धारण में गंभीर खामियां रहीं। ये सभी आरोप गहलोत ने मीडिया से बातचीत में लगाए हैं।
सूखे से प्रभावित जिलों में राहत की मांग
राजनीतिक मुद्दों के साथ गहलोत ने राजस्थान में सूखे और पानी की कमी को लेकर भी चिंता जताई। जैसलमेर रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई इलाकों में हालात गंभीर हैं और सरकार को जमीनी स्थिति का आकलन कर तत्काल कदम उठाने चाहिए। गहलोत के मुताबिक, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर सहित पश्चिमी राजस्थान के कई क्षेत्रों में सूखे का असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि पशुधन के लिए चारे की कमी बढ़ रही है और कुछ क्षेत्रों में चारे की कीमत 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जलाशयों में पानी की उपलब्धता और पेयजल की स्थिति को देखते हुए सरकार को समय रहते योजना बनानी चाहिए। गहलोत ने मुख्यमंत्री स्तर पर निगरानी बढ़ाने और प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की जरूरत बताई।
‘काम के बदले अनाज’ योजना का किया जिक्र
गहलोत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अकाल राहत के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए ‘काम के बदले अनाज’ योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति में प्रभावित परिवारों और पशुधन को राहत पहुंचाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने गिरदावरी जल्द पूरी करवाने और उसके आधार पर अकाल राहत कार्य शुरू करने की मांग की। साथ ही केंद्र सरकार से सहयोग लेने की बात कही। उनका कहना था कि केवल घोषणाओं से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि प्रभावित गांवों तक राहत पहुंचाना जरूरी है। गहलोत ने राज्य सरकार से सूखे की स्थिति को गंभीरता से लेने और समय रहते राहत प्रबंधन सुनिश्चित करने की अपील की।



