Gems of India: देशभर के जमीनी स्तर के डिजिटल क्रिएटर्स को पहचान और मंच देने के उद्देश्य से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मंगलवार को जेम्स ऑफ इंडिया’ चैलेंज के पायलट चरण की शुरुआत की. इस राष्ट्रीय पहल का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना, भारत की सांस्कृतिक विविधता को डिजिटल माध्यम से दुनिया तक पहुंचाना और देश की उभरती ऑरेंज इकोनॉमी को मजबूत करना है.
यह पहल केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा शुरू किए गए ‘WAVES OTT’ के अंतर्गत सिटिजन किएटर प्लेटफॉर्म MyWAVES पर आधारित है. मंत्रालय के अनुसार, 1 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक डिजिटल क्रिएटर्स अपनी प्रविष्टियां MyWAVES पर अपलोड कर सकेंगे.
1 से 3 मिनट का वीडियो करना होगा अपलोड
चैलेंज में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों को 1 से 3 मिनट की अवधि का वीडियो तैयार कर MyWAVES सेक्शन पर अपलोड करना होगा. वीडियो के माध्यम से प्रतिभागी अपने जिले की संस्कृति, विरासत, पर्यटन, इतिहास, परंपराओं और स्थानीय उपलब्धियों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत कर सकेंगे.
7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पायलट शुरुआत
इस पहल का पायलट चरण फिलहाल अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, गोवा तथा लद्दाख में शुरू किया जा रहा है. कार्यक्रम का संचालन प्रसार भारती, माय भारत (MY Bharat) और संबंधित राज्य एवं जिला प्रशासन के सहयोग से किया जाएगा. स्थानीय सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थानों को भी इसमें सक्रिय भागीदारी के लिए जोड़ा जाएगा.
यूट्यूब और मेटा भी बने भागीदार
मंत्रालय ने बताया कि YouTube और Meta इस पहल के उद्योग साझेदार होंगे. दोनों प्लेटफॉर्म अपने-अपने क्रिएटर इकोसिस्टम के माध्यम से इस चैलेंज का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे और अधिक से अधिक डिजिटल क्रिएटर्स को इससे जोड़ने में सहयोग करेंगे.
तीन स्तर पर मिलेंगे पुरस्कार
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा.
जिला स्तर: प्रत्येक जिले में अधिकतम 20 विजेताओं को 50,000 रुपये तक का पुरस्कार.
राज्य स्तर: प्रत्येक जिले से चयनित एक श्रेष्ठ प्रतिभागी को 2 लाख रुपये का पुरस्कार.
राष्ट्रीय स्तर: राज्यों से चयनित सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को 5 लाख रुपये तक का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाएगा.
विशेषज्ञ करेंगे चयन
निष्पक्ष चयन सुनिश्चित करने के लिए जिला और राज्य स्तर पर निर्णायक समितियों का गठन किया जाएगा. इन समितियों में संस्कृति, विरासत, पर्यटन, मीडिया और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा.
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