Saturday, October 31, 2026
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आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करेगा एम्स मेडिकल बोर्ड, जानें सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत पर क्या कहा?

Supreme Court On Asaram: सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत याचिका पर एम्स के निदेशक को विशेषज्ञों का मेडिकल बोर्ड गठित कर एक सप्ताह में स्वास्थ्य रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत पर फैसला मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही होगा।

Supreme Court On Asaram: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति का स्वतंत्र चिकित्सकीय आकलन कराने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक को विशेषज्ञों का मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया है. आसाराम ने चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत देने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है.

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मेडिकल बोर्ड को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करे. अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत पर कोई निर्णय मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि फिलहाल नियमित जमानत पर विचार नहीं किया जा रहा है.अदालत पहले यह जानना चाहती है कि क्या वास्तव में चिकित्सकीय आधार पर अंतरिम राहत देने की आवश्यकता है. पीठ ने कहा- ‘हम नियमित जमानत नहीं दे रहे हैं. चिकित्सा आधार पर इसकी आवश्यकता है या नहीं, इस बारे में संतुष्ट होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा. पहले मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने दीजिए.’

सरकार ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कुछ महीने पहले आसाराम काशी विश्वनाथ और अयोध्या की यात्रा कर चुके हैं. उन्होंने दलील दी कि पहले उन्हें इस आधार पर अंतरिम जमानत मिली थी कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर थी, लेकिन बाद में वे यात्रा करते दिखाई दिए. इस पर अदालत ने कहा कि वह केवल मेडिकल बोर्ड की निष्पक्ष रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का फैसला करेगी.

आसाराम की ओर से क्या कहा गया?

आसाराम की ओर से पेश अधिवक्ता ने सुझाव दिया कि मामले को एम्स के निदेशक के पास भेजा जाए ताकि विशेषज्ञ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित कर विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा सके. उन्होंने कहा कि मेडिकल बोर्ड यह भी बताएगा कि आसाराम को अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता है या नहीं.

2013 के दुष्कर्म मामले में उम्रकैद

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 27 मई को 2013 में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था. हालांकि, हाईकोर्ट ने कथित सामूहिक दुष्कर्म से जुड़े कुछ आरोपों से उन्हें बरी किया था, लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) के तहत नाबालिग से दुष्कर्म की दोषसिद्धि को कायम रखा. इसके साथ ही बंधक बनाने, मानव तस्करी, आपराधिक धमकी, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, यौन उत्पीड़न, पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत हुई दोषसिद्धियां भी बरकरार रखी गई थीं.

गौरतलब है कि 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की विशेष अदालत ने आसाराम को नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में उनकी चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत की याचिका लंबित है.

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