Wednesday, September 9, 2026
HomeFact Checkजंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होना पड़ा भारी? छात्र को नोटिस पर CJI...

जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होना पड़ा भारी? छात्र को नोटिस पर CJI सूर्यकांत हुए नाराज

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने वाले ग्रेटर नोएडा के लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी को शांति भंग की आशंका के आधार पर ₹5 लाख के निजी मुचलके का नोटिस दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले पर CJI सूर्यकांत ने मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाए। नोटिस जारी होने के कुछ समय बाद ही उसे वापस ले लिया गया।

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने वाले ग्रेटर नोएडा के एक कानून छात्र को नोटिस जारी किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। छात्र को शांति भंग की आशंका के आधार पर पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस दिया गया था। मामले पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त नाराजगी जताते हुए मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेंड ईयर के लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, छात्र सितंबर की शुरुआत में जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन में शामिल हुआ था। इसके बाद ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से उसे नोटिस जारी किया गया। नोटिस में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की संबंधित धाराओं का हवाला देते हुए उससे शांति बनाए रखने के लिए पांच लाख रुपये का निजी बॉन्ड भरने को कहा गया था।

पुलिस की ओर से आरोप लगाया गया था कि छात्र ने अन्य छात्रों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और कथित तौर पर सरकार विरोधी बातें प्रचारित कीं, जिससे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बनने की आशंका थी। हालांकि, छात्र ने इन आरोपों से इनकार किया। उसका कहना था कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुआ था और किसी तरह की हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधि नहीं की।

मामले में खास बात यह रही कि नोटिस जारी होने के कुछ ही समय बाद उसे वापस ले लिया गया। कार्रवाई सामने आने के बाद इसे लेकर कानूनी और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवाल भी उठे।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने इस कार्रवाई को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया कि एक मजिस्ट्रेट इस तरह का नोटिस जारी करने की स्थिति में कैसे पहुंचा। कोर्ट की नाराजगी से साफ हुआ कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेने के अधिकार और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच संतुलन का मुद्दा गंभीर है।

सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका है कि शांतिपूर्ण और वैध विरोध प्रदर्शन संवैधानिक अधिकारों के दायरे में आता है। ऐसे में किसी छात्र या नागरिक के खिलाफ कार्रवाई करते समय प्रशासन को कानूनी प्रावधानों और मौलिक अधिकारों दोनों का ध्यान रखना होगा।

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

× Popup Image