नई दिल्ली। देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में दिल्ली-वाराणसी-गुवाहाटी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को वाराणसी में बताया कि प्रधानमंत्री ने इस कॉरिडोर के नॉर्दर्न सेक्शन को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित रूट दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या को जोड़ेगा। इसके बाद वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक पहुंचेगा। प्रस्तावित बुलेट ट्रेन से नई दिल्ली से आगरा का सफर करीब एक घंटे और वाराणसी तक की यात्रा लगभग 3 घंटे 30 मिनट में पूरी होने का अनुमान है। इससे यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा में काफी समय बचाने का अवसर मिलेगा।
दिल्ली-वाराणसी का सफर 10 घंटे से घटकर 3.5 घंटे
नई दिल्ली से वाराणसी की दूरी करीब 807 किलोमीटर है। फिलहाल तेजस और राजधानी जैसी ट्रेनों से यह सफर तय करने में 10 घंटे से अधिक का समय लगता है। प्रस्तावित बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यही दूरी लगभग साढ़े तीन घंटे में तय की जा सकेगी। इससे दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या और वाराणसी के बीच तेज कनेक्टिविटी विकसित होने की उम्मीद है।
वाराणसी से सिलीगुड़ी तक भी मिलेगी कनेक्टिविटी
रेलवे सूत्रों के अनुसार, सिलीगुड़ी से वाराणसी पहुंचने वाली बुलेट ट्रेन और वाराणसी से दिल्ली जाने वाली ट्रेन की टाइमिंग इस तरह निर्धारित की जा सकती है, जिससे यात्री एक ट्रेन से उतरकर दूसरी ट्रेन में आसानी से सवार हो सकें। फिलहाल वाराणसी से दिल्ली की हवाई यात्रा में विमान से करीब 1 घंटा 40 मिनट लगता है। हालांकि, एयरपोर्ट तक पहुंचने, चेक-इन और लैंडिंग के बाद बाहर निकलने का समय जोड़ने पर कुल यात्रा में लगभग चार घंटे लग सकते हैं। ऐसे में बुलेट ट्रेन का प्रस्तावित यात्रा समय हवाई यात्रा के बराबर या उससे भी कम हो सकता है।
मुंबई-अहमदाबाद से ज्यादा होगी यात्री क्षमता
भारत में पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर चलाने की योजना है। इस रूट पर प्रस्तावित ट्रेन में करीब 731 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। वहीं, वाराणसी से पटना के रास्ते सिलीगुड़ी जाने वाली प्रस्तावित बुलेट ट्रेन में लगभग 750 यात्रियों के सफर करने की क्षमता बताई जा रही है।
भूकंप आने पर तुरंत रुकेगी बुलेट ट्रेन
प्रस्तावित बुलेट ट्रेन में सुरक्षा के लिए जापानी तकनीक पर आधारित अर्थक्वेक वार्निंग सिस्टम लगाए जाने की जानकारी दी गई है। यह सिस्टम भूकंप के संकेत मिलते ही ट्रेन की बिजली आपूर्ति बंद कर देगा। इसके बाद इमरजेंसी ब्रेक सक्रिय होकर ट्रेन को रोक देंगे। इस तकनीक का उद्देश्य भूकंप जैसी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दिल्ली-वाराणसी-गुवाहाटी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के विकसित होने से उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी का नया विकल्प तैयार होने की उम्मीद है।



