नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन सोमवार को दिल्ली में तेज हो गया। राहुल गांधी के आह्वान पर कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के नेता सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने के लिए जुटे। विपक्ष की मांग है कि कथित वोट चोरी के आरोपों की जांच हो, SIR की प्रक्रिया पर रोक लगे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। राहुल गांधी के आह्वान पर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए राजस्थान के कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पीसीसी अध्यक्ष गोविंद्र सिंह डोटासरा समेत कांग्रेस के तमाम नेता दिल्ली पहुंचे।
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली के मध्य हिस्से में सुरक्षा बढ़ाई गई। हिमाचल भवन और मंडी हाउस के आसपास पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। हालांकि, इस बार सुरक्षा व्यवस्था शनिवार की तुलना में कुछ सीमित रही और कनॉट प्लेस समेत कई बाजारों में सामान्य गतिविधियां जारी रहीं।
हिमाचल के मुख्यमंत्री बोले, लोकतंत्र की रक्षा करना विपक्ष की जिम्मेदारी
दिल्ली में मंडी हाउस के पास हिमाचल भवन से मीडिया से बातचीत करते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना और नागरिकों की आवाज उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है। सुक्खू के मुताबिक, कांग्रेस ने पहले भी राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी करीब दो साल से चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। जब इन चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पार्टी ने आंदोलन का रास्ता अपनाया।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मार्च निकाल रही है। पार्टी का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए।
CJI से मुलाकात नहीं हो सकी, कांग्रेस अब कानूनी रास्ता अपनाएगी
कांग्रेस और विपक्षी दलों की योजना सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को ज्ञापन सौंपने की थी। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने विपक्षी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से उठाए गए मुद्दे पहले से अदालत के विचाराधीन हैं, इसलिए उन पर अलग से चर्चा करना न्यायिक मर्यादा के अनुरूप नहीं होगा।
इसके बाद कांग्रेस ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए उठाने की बात कही। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों पर पीछे नहीं हटेगा।
दिल्ली में छह मेट्रो स्टेशन बंद, कई मार्गों पर यातायात प्रभावित
विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सोमवार सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक छह मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास बंद रखने का फैसला किया। इनमें जनपथ, मंडी हाउस, बाराखंबा रोड, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक और पटेल चौक शामिल थे। इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई।
दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली के कई मार्गों पर यातायात नियंत्रित किया और वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था की। मंडी हाउस के आसपास पुलिस तथा रैपिड एक्शन फोर्स के जवान तैनात रहे। प्रदर्शनकारियों को एक जगह जमा होने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग भी की गई।
यह व्यवस्था शनिवार को लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों से कम थी। उस दिन दिल्ली में 45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को अधिकारियों को सार्वजनिक परिवहन सामान्य रखने, अनावश्यक बैरिकेड हटाने और लोगों की आवाजाही बाधित नहीं करने के निर्देश दिए थे।
मोहन यादव ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर साधा निशाना
दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बिहार के बोधगया में कांग्रेस और राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को विरोध प्रदर्शन करने के बजाय अपने संगठन को मजबूत करने और चुनावों में कमजोर प्रदर्शन के कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए।
मोहन यादव ने कहा कि लोकतंत्र में किसी राजनीतिक दल को जनता से मिले जनादेश के बाद विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी और उनके सहयोगियों पर विरोध के नाम पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि वह ऐसी राजनीति की निंदा करते हैं।
उन्होंने बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस को अपने राजनीतिक प्रदर्शन का विश्लेषण करने की सलाह दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार तीसरी बार केंद्र में सत्ता में आई है और भारत आर्थिक क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग आमने-सामने
कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के कारण पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी इस मामले में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी कर रही है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में सुधार का उद्देश्य दोहरे, मृत या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना है। भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों को गलत बताते हुए कहा है कि चुनावी प्रक्रिया पर बिना ठोस आधार सवाल उठाए जा रहे हैं।
दिल्ली में जारी इस विरोध के बीच अब नजर कांग्रेस की आगे की कानूनी रणनीति और SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर है। एक तरफ विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार और चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया का बचाव कर रहे हैं।



