रायपुर। छत्तीसगढ़ में कृषि विश्वविद्यालय की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने के मामले ने परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने मामले में एक प्रोफेसर और पांच छात्रों समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र को लिफाफे की सील तोड़े बिना हासिल करने के लिए बेहद छोटे एंडोस्कोप कैमरे का इस्तेमाल किया गया।
मामला इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में होने वाली बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की कीट विज्ञान परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा 20 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक होनी थी। यह परीक्षा विश्वविद्यालय से संबद्ध 28 कृषि महाविद्यालयों में आयोजित की जानी थी। परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र के बाहर आने की सूचना मिलने पर विश्वविद्यालय ने परीक्षा रद्द कर दी।
पुलिस जांच के अनुसार, दुर्ग स्थित एक निजी कृषि महाविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत योगेश सोनकेसरिया को प्रश्नपत्रों के वितरण और उत्तर पुस्तिकाएं जमा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी व्यवस्था का कथित तौर पर फायदा उठाकर उसने प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाई।
सील तोड़े बिना निकाली प्रश्नपत्र की तस्वीर
जांच में आरोप है कि प्रोफेसर ने 17 अगस्त को सीलबंद प्रश्नपत्र अपने पास पहुंचने के बाद एक सुई और अन्य उपकरण की मदद से लिफाफे में बेहद छोटा छेद किया। इसके बाद उसमें एक एंडोस्कोप कैमरा डालकर प्रश्नपत्र के सवालों की तस्वीरें ली गईं। इस तरीके से लिफाफे की बाहरी सील को बिना खोले ही प्रश्नपत्र की जानकारी हासिल कर ली गई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने प्रश्नपत्र की तस्वीरें हासिल करने के बाद उसे कुछ छात्रों को बेच दिया। इसके लिए कथित तौर पर 11 हजार रुपये लिए गए। इसके बाद प्रश्नपत्र कई छात्रों तक पहुंचा और सोशल मीडिया के जरिए भी प्रसारित हो गया।
परीक्षा से पहले सामने आई जानकारी
20 अगस्त की सुबह विश्वविद्यालय के अधिकारियों को ईमेल के जरिए प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी मिली। जांच में प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की पुष्टि के बाद परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया। पुलिस ने शिकायत मिलने के करीब 36 घंटे के भीतर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में दो अन्य छात्रों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र सुरक्षा व्यवस्था से बाहर कैसे पहुंचा और इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल थे। विश्वविद्यालय ने भी घटना की विस्तृत जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करने की बात कही है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
पेपर लीक की इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को और मजबूत करने की चुनौती खड़ी हो गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क में प्रोफेसर और छात्रों के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे।



