गांधीनगर (प्रज्ञा पांडे)। चांदीपुरा वायरस भारत के कुछ राज्यों में तेजी से बढ़ रहा है। अब इस वायरस का ताजा मामला गुजरात से सामने आया है। दरअसल स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में अब तक चांदीपुरा वायरस के 184 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से 35 मामलों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 11 सैंपल की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य टीमें सक्रिय हैं। चांदीपुरा वायरस खासतौर पर छोटे बच्चों को प्रभावित करता है। यह संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है और गंभीर मामलों में दिमाग में सूजन जैसी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में इस वायरस के लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं। शुरुआत में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, कमजोरी और बेचैनी जैसे सामान्य लक्षण नजर आते हैं, लेकिन कुछ मामलों में मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। अगर बच्चे को तेज बुखार के साथ दौरे पड़ने लगें, ज्यादा नींद आने लगे, शरीर में कमजोरी महसूस हो या व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
चांदीपुरा वायरस एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) और कुछ अन्य कीड़ों के काटने से फैल सकता है। यह वायरस पहली बार महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में पहचाना गया था, जिसके बाद इसका नाम चांदीपुरा वायरस पड़ा। यह संक्रमण आमतौर पर ग्रामीण और गर्म इलाकों में ज्यादा देखा जाता है, जहां कीड़ों की गतिविधि अधिक होती है। मानसून के दौरान नमी बढ़ने और पानी जमा होने से ऐसे संक्रमण फैलाने वाले कीड़ों की संख्या बढ़ सकती है। बारिश का मौसम मच्छरों और अन्य कीड़ों के प्रजनन के लिए अनुकूल माना जाता है। घरों के आसपास जमा पानी, गंदगी और खराब साफ-सफाई की स्थिति संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा सकती है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग लोगों से लगातार अपील कर रहा है कि वे अपने आसपास सफाई रखें, पानी जमा न होने दें और बच्चों में किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।
बढ़ते मामलों को देखते हुए गुजरात सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें संदिग्ध मरीजों की पहचान, जांच और इलाज की व्यवस्था पर काम कर रही हैं। इसके अलावा लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय पर इलाज शुरू किया जा सके। चांदीपुरा वायरस में सबसे महत्वपूर्ण बात समय पर पहचान और इलाज है। बच्चों में अगर इस वायरस के लक्षण दिखाई दे, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। वहीं गुजरात में बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग की नजर अब नए मामलों और जांच रिपोर्ट पर बनी हुई है।



