नई दिल्ली। 18वें BRICS Summit के दौरान भारत मंडपम में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गर्मजोशी भरा अंदाज देखने को मिला। पीएम मोदी ने शी जिनपिंग का हाथ पकड़कर उन्हें सम्मेलन स्थल की सजावट और आयोजन से जुड़ी तैयारियां दिखाईं। शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं।समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS को किसी के खिलाफ बनाया गया मंच नहीं, बल्कि सहयोग और संवाद के जरिए आगे बढ़ने वाला समूह बताया। उन्होंने कहा कि BRICS का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए मिलकर काम करना है।
संयुक्त बयान पर बनी सहमति
BRICS Summit के दौरान सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान को लेकर भी सहमति बन गई है। यह सहमति ऐसे समय में बनी है जब पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान युद्ध को लेकर BRICS देशों के बीच अलग-अलग रुख सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त बयान को लेकर बातचीत देर रात तक चली और भारत ने अलग-अलग मत रखने वाले देशों के बीच सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई।BRICS में ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे देश शामिल हैं, जिनके पश्चिम एशिया के मौजूदा घटनाक्रम को लेकर हित और रुख पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं। ऐसे में सभी देशों को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत की अध्यक्षता के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती थी।
पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत की कूटनीति
भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए संवाद की जरूरत पर जोर दिया था।
BRICS में 11 सदस्य देश
BRICS अब 11 सदस्य देशों का समूह है, जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE शामिल हैं। भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को 18वां BRICS Summit आयोजित किया जा रहा है।समिट में व्यापार, निवेश, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, सप्लाई चेन, तकनीक और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इसके साथ ही BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सुधार जैसे विषय भी अहम हैं।
भारत की अध्यक्षता में हो रहा यह समिट ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब BRICS के भीतर अलग-अलग देशों के अपने रणनीतिक हित हैं। ऐसे में साझा बयान पर सहमति और सहयोग का संदेश भारत के लिए एक अहम कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।



