कोटा/बारां। राजस्थान में निकाय चुनावों का बिगुल बजते ही बारां जिले की नवगठित अटरू नगर पालिका में बड़ा सियासी ड्रामा सामने आया है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर और उनकी पत्नी हेमलता दिलावर द्वारा अटरू की मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। प्रशासन की विस्तृत जांच के बाद दोनों के आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है। चूंकि अटरू को पहली बार नगर पालिका बनाया गया है और यहाँ अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, ऐसे में मंत्री परिवार की इस कवायद को सीधे तौर पर स्थानीय निकाय चुनाव में एंट्री से जोड़कर देखा जा रहा है।
बीएलओ ने की थी हरी झंडी, एसडीएम जांच में खुला सच
पवन और उनकी पत्नी हेमलता ने 21 अगस्त को अटरू के वार्ड नंबर 21 (भाग संख्या 1) की वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए प्रारूप-3 में आवेदन जमा किया था। आवेदन में उन्होंने बस स्टैंड के पास स्थित मकान नंबर 10 का पता दिया था। शुरुआत में बीएलओ (प्रगणक) ने नाम जोड़ने की सिफारिश करके फाइल एसडीएम कार्यालय भेज दी थी, लेकिन एसडीएम अंजना सहरावत के पास मामला पहुँचते ही कागजी कमियों की पोल खुल गई।
यह खबर भी पढ़ें:-राजस्थान में सरकारी स्कूलों और कानून-व्यवस्था पर सीजेपी की बैठक, आशुतोष रांका बोले- सरकार के पास समय कम है
जांच में सामने आई मुख्य खामियां:
- दस्तावेजों पर अंगूठा: आवेदन पत्रों में हस्ताक्षर की जगह अंगूठे के निशान लगे थे, और यह भी स्पष्ट नहीं था कि वे निशान किसके हैं।
- आधार कार्ड में कोटा का पता: प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, पवन और हेमलता के आधार कार्ड में ‘रंगबाड़ी, कोटा’ का पता दर्ज था, जबकि आवेदन में अटरू का अस्थाई पता दिया गया था।
- निवास प्रमाण पत्र का अभाव: राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक संबंधित क्षेत्र में सामान्य निवास का कोई दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किया गया।
मौके पर पहुँची 6 अफसरों की टीम, पड़ोसियों ने खोला राज
एसडीएम ने वास्तविक स्थिति जानने के लिए 21 अगस्त को तहसीलदार, अधिशासी अधिकारी (EO), भू-अभिलेख निरीक्षक, पटवारी, सुपरवाइजर और बीएलओ की एक संयुक्त जांच कमेटी बनाई।
24 अगस्त को जब इस टीम ने मौके पर जाकर मकान नंबर 10 और आसपास के दुकानदारों व पड़ोसियों से पूछताछ की, तो स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट कर दिया कि पवन और हेमलता वर्तमान में वहाँ नहीं रहते हैं और न ही पहले कभी वहाँ रहे हैं। पड़ोसियों के बयानों और साक्ष्यों के अभाव में एसडीएम एवं निर्वाचन पंजीयन अधिकारी ने दोनों आवेदनों को खारिज कर दिया।
यह खबर भी पढ़ें:-शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के परिवार में मचा बवाल! एक ही सीट से बेटा और भाई आमने-सामने?
‘अंगूठा ताईजी ने लगाया था, मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता’ — पवन दिलावर
इस पूरे घटनाक्रम पर सफाई देते हुए शिक्षा मंत्री के बेटे पवन दिलावर ने कहा— “हमने ऑनलाइन आवेदन किया था और उसमें मेरे हस्ताक्षर ही थे। मौके पर जब जांच टीम गई तो वहां ताईजी मिली थीं, उन्होंने तस्दीक के लिए अंगूठा लगाया था। मैंने चुनाव लड़ने के लिए यह आवेदन नहीं किया था और अब मैं नाम भी नहीं जुड़वाना चाहता। हालांकि समर्थक और कार्यकर्ता हमेशा यही चाहते हैं कि हमारा अटरू से सीधा जुड़ाव बना रहे।”
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि पवन दिलावर और उनके चाचा कृष्णमुरारी दिलावर अटरू के पहले पालिकाध्यक्ष पद की रेस में उतरने की रणनीति बना रहे थे, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई और पड़ोसियों के बयान के बाद फिलहाल यह दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है।



