कोटा/बारां। राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के गृह क्षेत्र बारां की नवगठित अटरू नगर पालिका के पहले ही चुनाव में सियासी ड्रामा चरम पर पहुंच गया है। पहले चुनाव में टिकट वितरण से ठीक पहले उस वक्त हड़कंप मच गया, जब यह खबर सामने आई कि मंत्री के बेटे पवन दिलावर और उनके छोटे भाई कृष्णमुरारी दिलावर दोनों ने ही वार्ड नंबर-5 से पार्षद का टिकट मांगा है। अटरू नगर पालिका अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित होने के कारण दिग्गजों ने अभी से ही अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है।
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मंडल अध्यक्ष का दावा बनाम मंत्री के बेटे का इनकार
टिकट को लेकर उठ रहे सवालों के बीच विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं:
- बीजेपी अटरू मंडल अध्यक्ष का पक्ष: बीजेपी मंडल अध्यक्ष पवन गंदोलिया ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि शिक्षा मंत्री के छोटे भाई कृष्णमुरारी दिलावर और बेटे पवन दिलावर दोनों ने वार्ड नंबर 5 से बीजेपी से टिकट की अर्जी दी है।
- मंत्री के बेटे की सफाई: दूसरी तरफ मंत्री के बेटे पवन दिलावर ने टिकट मांगने की बात से साफ इनकार किया है। पवन का कहना है— “मैंने न तो कोई आवेदन किया है और न ही मेरी चुनाव लड़ने की इच्छा है। अटरू के युवा मोर्चा कार्यकर्ता जरूर दबाव बना रहे हैं, लेकिन जब पर्यवेक्षक का फोन आया था, तब भी मैंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था।”
बता दें कि पवन दिलावर सितंबर 2023 में रामगंजमंडी में भाजपा की परिवर्तन यात्रा के दौरान एक मंच पर पार्टी कार्यकर्ता को थप्पड़ मारने के आरोप में विवादों में रह चुके हैं।
3 बार के सरपंच भाई ने ठोका मजबूत दावा
दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री के भाई कृष्णमुरारी दिलावर अपनी दावेदारी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनता ने उन्हें पहले भी तीन बार लगातार सरपंच चुनकर सेवा का मौका दिया है। अगर पार्टी संगठन उन पर भरोसा जताता है, तो वे अटरू में भाजपा का बोर्ड बनाने के लिए पूरी ताकत लगा देंगे।
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अटरू में टिकटों को लेकर जबर्दस्त मारामारी
ग्राम पंचायतों (अटरू, लक्ष्मीपुरा, खेड़लीगंज, रतनपुरा आदि) को मिलाकर बनी इस नई नगर पालिका में कुल 25 वार्ड हैं। यहाँ दावेदारों की होड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:
- बीजेपी: 25 वार्डों के लिए कुल 110 आवेदन मिले हैं।
- कांग्रेस: 25 वार्डों के लिए 248 आवेदन आए हैं।
पिछली पंचायत समिति के चुनावों में यहाँ के 15 वार्डों में से कांग्रेस को 9, बीजेपी को 5 और 1 सीट निर्दलीय को मिली थी। ऐसे में पहली नगर पालिका की अध्यक्ष पद की कुर्सी पाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों में अंदरूनी खींचतान जारी है।



