जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में सरकारी भुगतान व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर दावा किया कि प्रदेश का सरकारी भुगतान तंत्र पूरी तरह ठप हो चुका है। गहलोत ने आरोप लगाया कि कर्मचारी, पेंशनभोगी, अस्पताल, दवा विक्रेता, छोटे ठेकेदार और दुर्घटना पीड़ित परिवार महीनों से अपने वैध भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर लोगों को राहत देने की मांग की।
अशोक गहलोत ने अपने पत्र में लिखा कि राजस्थान के इतिहास में वित्तीय कुप्रबंधन की ऐसी स्थिति पहले कभी देखने को नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यह समस्या किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग हर वर्ग इससे प्रभावित हो रहा है।गहलोत के मुताबिक, सरकारी भुगतान में लगातार हो रही देरी से कर्मचारियों, पेंशनरों और सेवा प्रदाताओं का सरकार पर से भरोसा कमजोर हो रहा है।
RGHS योजना में अस्पतालों का करोड़ों का भुगतान अटका
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और मेडिकल स्टोरों का करोड़ों रुपये का भुगतान महीनों से लंबित है।उन्होंने दावा किया कि कई अस्पतालों ने भुगतान नहीं मिलने के कारण योजना के तहत सेवाएं सीमित करने या एमओयू खत्म करने तक की चेतावनी दी है। इससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को कैशलेस इलाज के बजाय पहले अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है।
दुर्घटना पीड़ित परिवारों को भी नहीं मिल रही सहायता
गहलोत ने मुख्यमंत्री चिरंजीवी और आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में मृत्यु होने पर मिलने वाली 5 लाख रुपये की सहायता राशि कई स्वीकृत मामलों में अब तक जारी नहीं हुई है।उन्होंने कहा कि जिस परिवार ने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया हो, उसे महीनों तक आर्थिक सहायता के लिए इंतजार करना पड़ना सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
पत्र में गहलोत ने आरोप लगाया कि रिटायर हो चुके कर्मचारियों को GPF, ग्रुप इंश्योरेंस, ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाश (PL) जैसी राशि समय पर नहीं मिल रही है।इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी कई जिलों में महीनों से लंबित है, जिससे बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशनभोगियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रेजरी से पास हो चुके बिलों का भुगतान भी लंबे समय से नहीं हो रहा है। इसका असर सड़क, पेयजल और अन्य विकास कार्यों पर पड़ रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे ठेकेदारों को अपने भुगतान के लिए अखबारों में विज्ञापन देकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना पड़ रहा है, जिससे हजारों श्रमिकों और छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हो रही है।अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अपील की कि वे इस पूरे मामले को गंभीरता से लें और जल्द से जल्द भुगतान व्यवस्था को सामान्य बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, ताकि कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, अस्पतालों और अन्य प्रभावित वर्गों को राहत मिल सके।



