Sunday, May 3, 2026
HomeIndiaRajasthan Politics: राजस्थान के दिग्गज नेता Babulal Bairwa का निधन, क्षेत्र के...

Rajasthan Politics: राजस्थान के दिग्गज नेता Babulal Bairwa का निधन, क्षेत्र के ‘अजेय’ योद्धा का जयपुर में लंबा इलाज के बाद अवसान

कठूमर के पूर्व विधायक और राजस्थान के कद्दावर नेता बाबूलाल बैरवा (Babulal Bairwa) का जयपुर में निधन हो गया। 4 बार विधायक रहे बैरवा ने निर्दलीय, भाजपा और कांग्रेस से चुनाव जीतकर अपनी ताकत दिखाई थी। उनके निधन से मेवात क्षेत्र में शोक की लहर है। देखिए उनके 40 साल लंबे राजनीतिक सफर की पूरी कहानी।

अलवर/जयपुर। राजस्थान की राजनीति और विशेषकर मेवात क्षेत्र के कद्दावर नेता व कठूमर (अलवर) के पूर्व विधायक बाबूलाल बैरवा (Babulal Bairwa) का रविवार तड़के निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे और पिछले करीब दो सप्ताह से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। जयपुर के सवाई मान सिंह (SMS) अस्पताल में इलाज के दौरान तड़के करीब 3:00 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही अलवर जिले सहित पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

बीमारी से लंबी लड़ाई और अंतिम क्षण

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, बाबूलाल बैरवा पिछले 12-13 दिनों से अस्वस्थ थे। उन्हें ब्लड प्रेशर (BP), शुगर और अस्थमा जैसी पुरानी बीमारियां थीं, जिसके चलते उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके पार्थिव देह को उनके पैतृक निवास खेड़ली लाया गया है, जहां स्थानीय लोग और समर्थक अपने चहेते नेता के अंतिम दर्शन कर सकेंगे।

यह खबर भी पढ़ें:-NEET UG 2026: 27 जिलों के 611 केंद्रों पर होगी परीक्षा, अभ्यर्थियों के लिए रेलवे चलाएगा स्पेशल ट्रेन

राजनीतिक सफर: दल कोई भी हो, दबदबा हमेशा ‘बैरवा’ का रहा

बाबूलाल बैरवा राजस्थान के उन गिने-चुने नेताओं में से थे जिनका अपना व्यक्तिगत जनाधार किसी भी पार्टी के सिंबल से बड़ा था। उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने निर्दलीय, कांग्रेस और भाजपा-तीनों ही रूपों में चुनाव जीतकर अपनी लोकप्रियता साबित की।

कॅरियर के मुख्य पड़ाव

राजनीति का आगाज (1980): उन्होंने अपने चुनावी सफर की शुरुआत 1980 में एक निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर की और भारी मतों से जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे।

कांग्रेस के साथ सफर (1985): पहली जीत के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और 1985 के चुनाव में दोबारा विधायक बने।

भाजपा से जीत (2008): साल 2008 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और फिर से जीत का परचम लहराया।

चौथी बार विजय (2018): साल 2018 के विधानसभा चुनाव में वे फिर से कांग्रेस के पाले में आए और चौथी बार विधायक बनकर विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ीं।

वे न केवल विधायक रहे, बल्कि अलवर के उपजिला प्रमुख के रूप में भी उन्होंने जिले के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका राजनीतिक कॅरियर करीब चार दशकों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को पुरजोर तरीके से सदन में उठाया।

यह खबर भी पढ़ें:-राजस्थान की राजनीति में बड़ा ‘खेला’: मदन राठौड़ ने सचिन पायलट को दिया BJP का खुला ऑफर, गहलोत का CM को ‘लेटर बम’

कठूमर और खेड़ली में शोक की लहर

बाबूलाल बैरवा के निधन को कठूमर क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने हमेशा आम आदमी और पिछड़ों की राजनीति की। उनकी अंतिम यात्रा खेड़ली बाइपास रोड स्थित उनके निवास से निकाली जाएगी, जिसमें प्रदेश के कई दिग्गज नेताओं के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्रियों और विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं ने बैरवा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे राजस्थान की राजनीति के एक अध्याय का अंत बताया है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

× Popup Banner