नासिक। महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की बीपीओ यूनिट से जुड़े एक मामले ने कॉर्पोरेट जगत को झकझोर कर रख दिया है। यहां महिला कर्मचारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न, दबावपूर्वक धार्मिक गतिविधियों में शामिल कराने और शोषण के आरोप सामने आए हैं।
पुलिस ने करीब 40 दिनों तक गुप्त रूप से जांच की, जिसके बाद अब तक 9 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस कार्रवाई के तहत छह टीम लीडर्स और एचआर विभाग से जुड़ी एक अधिकारी सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले में पूर्व एचआर मैनेजर निदा खान की भूमिका संदिग्ध और महत्वपूर्ण पाई गई है।
निदा खान, जो सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से शिक्षित हैं, टीसीएस की नासिक इकाई में मानव संसाधन विभाग में मैनेजमेंट स्तर पर कार्यरत थीं। वे आंतरिक शिकायत समिति का भी हिस्सा थीं, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान और कार्यस्थल को सुरक्षित बनाए रखना होता है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने जनवरी 2026 में कंपनी छोड़ दी थी।
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प्रभावित महिलाओं, जिनकी उम्र ज्यादातर 18 से 25 वर्ष के बीच बताई जा रही है, ने आरोप लगाया है कि कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों ने उन्हें वेतन वृद्धि, प्रमोशन और नौकरी में स्थायित्व का लालच देकर अपने प्रभाव में लिया। इसके बाद उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया, संबंध बनाने के लिए दबाव बनाया गया और विरोध करने पर धमकाया गया। कुछ मामलों में गंभीर यौन अपराधों के आरोप भी सामने आए हैं।
महिलाओं ने यह भी दावा किया है कि उन्हें कुछ धार्मिक प्रथाओं को अपनाने के लिए मजबूर किया गया, जैसे नमाज अदा करना या रोजा रखना, और यहां तक कि धर्म परिवर्तन का दबाव भी डाला गया।
निदा खान पर यह आरोप है कि उन्होंने कर्मचारियों द्वारा की गई कई शिकायतों को अनदेखा किया। कहा जा रहा है कि दर्जनों ईमेल और संदेशों के बावजूद उन्होंने मामलों को आगे नहीं बढ़ाया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जांच एजेंसियों का मानना है कि उन्होंने आरोपियों को बचाने और शिकायतों को दबाने में अहम भूमिका निभाई।
फिलहाल पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले समय में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



