Tuesday, August 4, 2026
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सिगरेट का ‘सेफ’ विकल्प या नई लत? युवाओं में तेजी से बढ़ रहा निकोटिन पाउच का ट्रेंड, जानिए कितना खतरनाक है यह ट्रेंड!

जागो इंडिया जागो डिजिटल डेस्क (प्रज्ञा पांडे)। धुएं और बदबू से मुक्त होने के कारण निकोटिन पाउच युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कॉलेज कैंपस, ऑफिस और सोशल मीडिया पर इसका इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। कई लोग इसे सिगरेट छोड़ने का आसान और सुरक्षित विकल्प मानते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके बढ़ते उपयोग को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह धूम्रपान का सुरक्षित विकल्प नहीं, बल्कि निकोटिन की नई लत की शुरुआत भी बन सकता है।

क्या होता है निकोटिन पाउच?

निकोटिन पाउच एक छोटा सफेद पाउच होता है, जिसे होंठ और मसूड़ों के बीच रखा जाता है। इसमें तंबाकू की पत्तियां नहीं होतीं, लेकिन निकोटिन, फ्लेवर, स्वीटनर और अन्य रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं। यह मुंह की अंदरूनी त्वचा के जरिए सीधे शरीर में निकोटिन पहुंचाता है।

कैसे लगती है इसकी लत?

निकोटिन कुछ ही मिनटों में मस्तिष्क तक पहुंचकर डोपामाइन नामक रसायन का स्तर बढ़ाता है, जिससे थोड़े समय के लिए अच्छा महसूस होता है, तनाव कम लगता है और ऊर्जा बढ़ने का एहसास होता है। लेकिन असर खत्म होने के बाद दोबारा निकोटिन लेने की इच्छा होती है। यही प्रक्रिया धीरे-धीरे निकोटिन पर निर्भरता और लत का कारण बन सकती है।

WHO ने क्यों जताई चिंता?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कई कंपनियां निकोटिन पाउच को “Tobacco-Free”, “Smoke-Free” और “Clean” जैसे शब्दों के साथ प्रचारित करती हैं। इससे युवाओं में यह धारणा बनती है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू-मुक्त (Tobacco-Free) होने का मतलब स्वास्थ्य के लिए जोखिम-मुक्त (Risk-Free) होना नहीं है।

एक पाउच में कितना निकोटिन होता है?

बाजार में उपलब्ध अलग-अलग ब्रांडों के निकोटिन पाउच में लगभग 2 मिलीग्राम से 20 मिलीग्राम तक निकोटिन हो सकता है। अधिक निकोटिन वाले पाउच का असर ज्यादा होता है और उनसे लत लगने का खतरा भी बढ़ जाता है।

निकोटिन पाउच के इस्तेमाल से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-


दिल की धड़कन तेज होना
ब्लड प्रेशर बढ़ना
चक्कर आना
मतली और सिरदर्द
बेचैनी
मसूड़ों और मुंह के ऊतकों को नुकसान

यदि कोई व्यक्ति गलती से निकोटिन पाउच निगल ले, तो निकोटिन पॉइजनिंग का खतरा हो सकता है। इसके लक्षणों में-

उल्टी
चक्कर आना
अत्यधिक पसीना आना
दिल की धड़कन तेज होना
घबराहट
गंभीर मामलों में सांस लेने में परेशानी होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इन लोगों को निकोटिन पाउच से पूरी तरह बचना चाहिए-

18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे और किशोर
गर्भवती महिलाएं
स्तनपान कराने वाली माताएं
उच्च रक्तचाप या हृदय रोग से पीड़ित लोग
निकोटिन से एलर्जी वाले व्यक्ति

यदि बिना निकोटिन पाउच के बेचैनी महसूस होने लगे, बार-बार इसे लेने की इच्छा हो या इसकी मात्रा बढ़ती जाए, तो यह निकोटिन पर निर्भरता का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निकोटिन छोड़ने के लिए डॉक्टर की निगरानी में निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT), काउंसलिंग और अन्य उपचार अपनाए जा सकते हैं। इसके अलावा नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव कम करने वाली गतिविधियां और परिवार का सहयोग भी इस प्रक्रिया में मददगार साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि निकोटिन पाउच से धुआं नहीं निकलता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह पूरी तरह सुरक्षित है। इसमें मौजूद निकोटिन शरीर और मस्तिष्क दोनों को प्रभावित करता है और इसकी लत लगने का खतरा बना रहता है। इसलिए इसे सिगरेट का “सुरक्षित विकल्प” मानने से पहले इसके स्वास्थ्य जोखिमों को समझना बेहद जरूरी है।

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