Tuesday, May 19, 2026
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अमेरिका की न्यूयॉर्क अदालत ने अडानी को 30 अप्रैल तक का दिया वक्त

न्यूयॉर्क। अमेरिका की एक न्यायालय ने उद्योगपति गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी की याचिका पर सुनवाई की मंजूरी दे दी है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग द्वारा लगाए गए धोखाधड़ी आरोपों को चुनौती दी है। अदाणी समूह के वकीलों का दावा है कि यह विवाद अमेरिकी कानून के दायरे से बाहर आता है और उनके मुवक्किलों का इस मामले से सीधे कोई संबंध नहीं है। न्यायालय ने प्रतिवादियों की याचिका पर यह आदेश दिया कि मामला खारिज करने से पहले दोनों पक्षों को बातचीत करने का अवसर दिया जाए।

कानूनी टीम ने अदालत को बताया कि एसईसी द्वारा प्रस्तुत आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं। वकीलों के अनुसार, जिन बयानों के आधार पर यह मुकदमा चलाया गया, वे किसी भी तरह से दंडनीय या कार्रवाई योग्य नहीं हैं। यह विवाद नवंबर 2024 से शुरू हुआ था, जब अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप लगाया कि अदाणी समूह ने भारत में सौर ऊर्जा ठेके हासिल करने के लिए स्थानीय अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर से अधिक की रिश्वत देने का प्रयास किया। साथ ही, आरोप है कि अमेरिकी निवेशकों और बैंकों को इस योजना की जानकारी नहीं दी गई।

अदाणी समूह ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है और कहा कि उनके किसी भी संगठन या अधिकारियों पर अमेरिकी विदेशी भ्रष्टाचार कानून के तहत कोई मामला नहीं है। इसके अलावा, अदाणी ग्रुप की नवीकरणीय ऊर्जा शाखा, अदाणी ग्रीन एनर्जी, इस विवाद में शामिल नहीं है। गौतम अदाणी समूह के अध्यक्ष हैं और सागर अदाणी अदाणी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक। समूह के वकीलों ने अदालत में बताया कि 75 करोड़ डॉलर के बॉन्ड की बिक्री अमेरिका के बाहर हुई थी और इसमें अमेरिकी नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ।

याचिका में यह भी कहा गया कि किसी निवेशक को वित्तीय हानि नहीं हुई, क्योंकि 2024 में बॉन्ड की अवधि समाप्त होने पर सभी को मूलधन और ब्याज का भुगतान कर दिया गया। अदाणी पक्ष का कहना है कि यह मामला पूरी तरह भारत से संबंधित है, जिसमें भारतीय प्रतिवादी और कंपनियाँ शामिल हैं, इसलिए अमेरिकी प्रतिभूति कानून लागू नहीं होते। अदालत ने मामले को खारिज करने से पहले 30 अप्रैल 2026 तक अदाणी समूह को अपनी दलील पेश करने का समय दिया।

याचिका में यह भी बताया गया कि बॉन्ड बिक्री के अधिकांश हिस्से अमेरिका के बाहर हुए थे। केवल बहुत कम हिस्सा अमेरिका के निवेशकों तक अन्य कंपनियों के माध्यम से पहुँचा, जिसमें अदाणी ग्रीन का कोई हस्तक्षेप नहीं था। वकीलों ने यह भी स्पष्ट किया कि गौतम अदाणी ने बॉन्ड जारी करने या निवेशकों को निर्देश देने में कोई भूमिका नहीं निभाई।

अदाणी के वकीलों ने अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए यह तर्क पेश किया कि कंपनी की प्रशंसात्मक टिप्पणियाँ धोखाधड़ी नहीं मानी जा सकतीं और एसईसी यह साबित करने में नाकाम रही कि अदाणी का किसी को धोखा देने का इरादा था। अदाणी पक्ष ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे पूरी तैयारी के साथ सुनवाई में शामिल होंगे और 30 अप्रैल तक मामले को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव पेश करेंगे। गौतम अदाणी का प्रतिनिधित्व सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी कर रहे हैं, जबकि सागर अदाणी की पैरवी निक्सन पीबॉडी एलएलपी और हेकर फिंक एलएलपी कर रहे हैं।

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