Taipei Open 2026 : ताइपे सिटी। युवा भारतीय सनसनी तन्वी शर्मा ने रविवार को यहां ताइपे ओपन सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल फाइनल में वियतनाम की छठी वरीय थुई लिन्ह एनगुएन को सीधे गेम में हराकर अपना पहला बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर खिताब जीता। पिछले साल अमेरिकी ओपन सुपर 300 में उप विजेता रही पंजाब की 17 साल की तन्वी ने फाइनल में एनगुएन को 36 मिनट में 21-16, 21-16 से हराया। पीवी सिंधू के पूर्व मेंटर (मार्गदर्शक) पार्क ताए संग से कोचिंग लेने वाली तन्वी 2008 में साइना नेहवाल के बाद ताइपे ओपन का महिला एकल खिताब जीतने वाली पहली भारतीय हैं।

तन्वी ने मुकाबले की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की। उन्होंने अपने प्रभावी ड्रॉप शॉट से एनगुएन को लगातार छकाते हुए 4-1 की बढ़त बना ली। ड्रॉप शॉट और क्रॉस कोर्ट स्मैश का बेहतरीन मिश्रण करते हुए भारतीय खिलाड़ी ने बढ़त को 10-2 तक पहुंचा दिया। वियतनाम की खिलाड़ी तन्वी के खेल को पढ़ने और शटल की दिशा का सही आकलन करने में संघर्ष करती नजर आई। हालांकि इसके बाद तन्वी से लगातार कुछ सहज गलतियां हुईं जिससे एनगुएन को वापसी का मौका मिला। इसके बावजूद तन्वी ने एक दमदार स्मैश लगाकर ब्रेक तक तीन अंक की बढ़त बरकरार रखी।
मध्यांतर के बाद तन्वी ने फिर लय हासिल की और दोनों ओर से दमदार स्मैश लगाते हुए 15-9 की बढ़त बना ली। नेट और बैक कोर्ट से कुछ अंक गंवाने के बावजूद उन्होंने मुकाबले पर अपनी पकड़ बनाए रखी। पांच गेम प्वाइंट हासिल करने के बाद उन्होंने क्रॉस कोर्ट स्मैश के साथ पहला गेम अपने नाम कर लिया। कोर्ट बदलने के बाद एनगुएन ने तेज शुरुआत करते हुए 3-0 की बढ़त बनाई और तन्वी को पूरे कोर्ट पर दौड़ाया। भारतीय खिलाड़ी ने धीरे-धीरे रैलियों पर नियंत्रण स्थापित किया और शानदार नेट शॉट की मदद से स्कोर 3-3 से बराबर कर दिया। इसके बाद उन्होंने विरोधी को लगातार बैक कोर्ट में धकेलते हुए नेट पर अपने नपे-तुले शॉट से दबाव बनाए रखा।

तन्वी ने 8-4 की बढ़त बना ली। हालांकि एक बार फिर तन्वी की कुछ गलतियों के कारण वियतनाम की खिलाड़ी ने अंतर घटाकर 7-8 कर दिया। तन्वी ब्रेक तक 11-8 की बढ़त हासिल करने में सफल रहीं। इसके बाद तन्वी ने धीरे-धीरे अपनी बढ़त 15-10 और फिर 18-12 तक पहुंचाई। उनके भ्रामक शॉट लगातार उन्हें महत्वपूर्ण अंक दिलाते रहे। 19-12 के स्कोर पर लाइन कॉल को लेकर उनकी चुनौती असफल रही लेकिन इसके तुरंत बाद दमदार स्मैश के साथ उन्होंने सात मैच प्वाइंट हासिल कर लिए। शुरुआती तीन मैच प्वाइंट गंवाने के बावजूद तन्वी ने चौथे अवसर का फायदा उठाते हुए मुकाबला और अपना पहला बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर खिताब जीत लिया। जीत के बाद भावुक क्षण में तन्वी ने अपना स्वर्ण पदक उतारकर कोच पार्क के गले में पहनाया। इसके बाद दोनों ने साथ में तस्वीरें खिंचवाईं।
तन्वी 17 साल और 222 दिन की उम्र में टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे कम उम्र की फाइनलिस्ट भी बनीं। उन्होंने कोरिया के महान युगल खिलाड़ी ली योंग डे को पीछे छोड़ दिया जो 2006 में पुरुष युगल फाइनल में पहुंचने पर 17 साल और 287 दिन के थे। पूर्व विश्व जूनियर नंबर एक तन्वी विश्व जूनियर चैंपियनशिप के एक ही सत्र में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं। उन्होंने लड़कियों के एकल वर्ग में रजत पदक के अलावा मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। वह उस भारतीय टीम की भी सदस्य थीं जिसने एशियाई टीम चैंपियनशिप में देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता था। तन्वी 16 साल की उम्र में 2025 अमेरिकी ओपन में अपने पहले सुपर 300 फाइनल में पहुंचीं। वह इस साल ताइपे ओपन में खिताबी मुकाबले में भी पहुंची और ओडिशा मास्टर्स सुपर 100 तथा गुवाहाटी मास्टर्स सुपर 100 में भी उप विजेता रहीं और दुनिया की शीर्ष 35 खिलाड़ियों में शामिल हो गईं।



