नई दिल्ली। देशभर में NEET-UG पेपर लीक विवाद और लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है और इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) के माध्यम से साझा की है। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि छात्रों का भविष्य और देशहित किसी भी व्यक्तिगत या राजनीतिक विवाद से सर्वोपरि है।
पिछले कुछ दिनों से चल रहे घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्री का यह कदम काफी बड़ा माना जा रहा है। आइए जानते हैं उनके इस्तीफे के पत्र की 5 मुख्य बातें:-
1) छात्रों का भविष्य सबसे ऊपर: धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा कि वे देश के युवाओं की भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का पूरा सम्मान करते हैं। बच्चों का भविष्य किसी भी विवाद या कानूनी पेचीदगियों में नहीं उलझना चाहिए, इसलिए उन्होंने यह नैतिक कदम उठाया है।
2) 3 मई की परीक्षा और CBI जांच का जिक्र: पत्र में उन्होंने स्वीकार किया कि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं पाई गई थीं। सरकार ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया था।
3) अगले साल से ऑनलाइन (CBT) मोड में परीक्षा: शिक्षा मंत्री ने अपने पत्र में भविष्य के सुधारों का जिक्र करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि अगले साल से होने वाली नीट परीक्षा का आयोजन ऑनलाइन यानी कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में किया जाएगा।
4) जिम्मेदारी से कभी नहीं मोड़ा मुंह: उन्होंने अपने पत्र में कहा कि वह पिछले चार दशकों से शिक्षा सुधार और छात्रों के हितों के लिए समर्पित रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्होंने पहले दिन से अपनी जिम्मेदारी ली और कभी भी इस परिस्थिति से मुंह नहीं मोड़ा। उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य खराब नहीं होने दिया जाएगा।
5) 10 दिनों के घटनाक्रम से दुखी मन: प्रधान ने अपने पत्र में यह भी साझा किया कि पिछले कुछ दिनों से हो रही घटनाओं के कारण उनका मन दुखी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मामला उनके व्यक्तिगत सम्मान का नहीं, बल्कि देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का सवाल है।



