कीव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच यूक्रेन ने रूस के ऊर्जा ढांचे पर एक और बड़ा हमला किया है। यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन के जरिए रूस की कई तेल रिफाइनरियों और रणनीतिक ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि इन अभियानों का उद्देश्य रूस की सैन्य और आर्थिक क्षमता को कमजोर करना है, ताकि युद्ध के लिए आवश्यक ईंधन और संसाधनों की आपूर्ति प्रभावित हो सके।
यूक्रेनी प्रशासन के अनुसार, हाल के दिनों में रूस के भीतर स्थित कई महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों पर सटीक ड्रोन हमले किए गए। इन हमलों के बाद कुछ स्थानों पर आग लगने और उत्पादन प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि नुकसान का पूरा आकलन अभी सामने नहीं आया है। यूक्रेन का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे अभियानों को जारी रखा जाएगा, जिससे रूस पर लगातार रणनीतिक दबाव बनाए रखा जा सके। रूस ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने बड़ी संख्या में यूक्रेनी ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया।
हालांकि कुछ ड्रोन सुरक्षा घेरा भेदने में सफल रहे, जिससे कुछ औद्योगिक और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा। रूसी प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के साथ ही नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। इस बीच रूस ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। रूसी सेना ने यूक्रेन के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें राजधानी कीव समेत अन्य क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में नागरिक इलाकों को नुकसान पहुंचने, कई लोगों के घायल होने और जान-माल की हानि की खबरें सामने आई हैं। आपातकालीन टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि रूस लगातार बड़े पैमाने पर हमले कर रहा है, इसलिए यूक्रेन को अपनी वायु सुरक्षा और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने सहयोगी देशों से आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और रक्षा उपकरणों की आपूर्ति तेज करने की अपील की, ताकि नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन अब केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहकर रूस के रणनीतिक ऊर्जा नेटवर्क को निशाना बना रहा है। इससे रूस की युद्ध संबंधी आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं रूस भी लगातार जवाबी हमलों के जरिए यूक्रेन के बुनियादी ढांचे और सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते हमलों से यह स्पष्ट है कि युद्ध फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा और आने वाले दिनों में संघर्ष और अधिक तीव्र हो सकता है।



