Monday, August 17, 2026
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तरुण तेजपाल को रेप केस में 10 साल की सजा, हाईकोर्ट ने पलटा 2021 का बरी फैसला

पणजी/गोवा (प्रज्ञा पांडे)। तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को 2013 के रेप और यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने उन्हें दोषी करार देते हुए 10 साल जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने गोवा ट्रायल कोर्ट के साल 2021 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें तेजपाल को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को दो हफ्ते के अंदर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले में पेश किए गए सबूतों और तथ्यों के आधार पर उन्हें दोषी माना।

2013 में महिला पत्रकार ने लगाए थे आरोप

यह मामला नवंबर 2013 का है। आरोप लगाने वाली महिला तहलका मैगजीन में जूनियर पत्रकार थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि गोवा में आयोजित तहलका के “थिंक फेस्ट” कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने उनका यौन उत्पीड़न किया। घटना के बाद महिला पत्रकार ने तहलका की तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को ईमेल के जरिए शिकायत भेजी थी। शिकायत सामने आने के बाद गोवा पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, ईमेल रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण सबूत जुटाए थे।

2021 में ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी

इस मामले में गोवा की सेशन कोर्ट ने मई 2021 में तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाया। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि निचली अदालत ने उपलब्ध सबूतों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया और पीड़िता के घटना के बाद के व्यवहार पर ज्यादा ध्यान दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बदलते हुए तेजपाल को दोषी माना। अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत उन्हें दोषी ठहराया, जो रेप, यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधों से जुड़ी हैं। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई।

वकील ने मांगी राहत, सरकार ने किया विरोध

सजा सुनाए जाने के बाद तरुण तेजपाल के वकील ने अदालत से राहत की अपील की। वकील ने कहा कि घटना को कई साल बीत चुके हैं और उम्र व अन्य परिस्थितियों को देखते हुए नरमी बरती जानी चाहिए। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राहत की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में समाज को स्पष्ट संदेश जाना जरूरी है। तरुण तेजपाल को नवंबर 2013 में गिरफ्तार किया गया था। वह करीब सात महीने जेल में रहे, जिसके बाद जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी। करीब 13 साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले ने इस मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।

कौन हैं तरुण तेजपाल?

तरुण तेजपाल देश के जाने-माने पत्रकार, लेखक और संपादक रहे हैं। उन्होंने साल 2000 में पत्रकार अनिरुद्ध बहल के साथ मिलकर खोजी वेबसाइट तहलका डॉट कॉम शुरू की थी, जो बाद में एक चर्चित मैगजीन के रूप में सामने आई। 2013 में लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद उनका नाम देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया था। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद उन्हें 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है।

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