Uddhav Thackeray News : मुंबई। शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस में विलय की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी हमेशा हिंदुत्व और ‘भूमिपुत्रों’ के अधिकारों की पक्षधर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवसेना का गठन किसी दल में विलय के लिए नहीं, बल्कि मराठी अस्मिता और हिंदुत्व की रक्षा के लिए हुआ था। चार साल में दूसरी बार अपनी पार्टी की संभावित टूट पर पहली टिप्पणी में ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि शिवसेना किसी के साथ विलय करने के लिए नहीं बनी है।
हिंदुत्व और मराठी हितों पर कायम शिवसेना
ठाकरे ने बाल ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर शिवसेना (उबाठा) कार्यकर्ताओं से कहा, ‘‘इसे मराठी लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने और हिंदुत्व की रक्षा करने के लिए बनाया गया था।’’ उन्होंने बागी सांसदों के उन दावों की आलोचना की जिनमें कहा गया था कि उन्हें डर था कि शिवसेना (उबाठा) कांग्रेस में विलय कर सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर 30 साल तक सहयोगी रहने के बावजूद हमने भाजपा के साथ विलय नहीं किया, तो हम कांग्रेस के साथ विलय कैसे कर सकते हैं? मुझे डर है कि कहीं महाराष्ट्र भाजपा का शिंदे नीत शिवसेना में विलय न हो जाये।’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ हमारे गहरे राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन उसने कभी भी शिवसेना को खत्म करने की कोशिश नहीं की, जैसा कि भाजपा कर रही है।
व्हिप की अनदेखी करते हुए, शिवसेना (उबाठा) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली में हुई संसदीय दल की एक अहम बैठक में शामिल नहीं हुए। बैठक में शामिल न होने वाले सांसदों में नागेश आष्टिकर, संजय जाधव, संजय देशमुख, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं।
शिव सैनिकों के भरोसे सांसद बने बागी नेता
पूर्व मुख्यमंत्री ने उन सांसदों को चुनने के लिए मतदाताओं से माफ़ी मांगी, जो अब पाला बदलने को तैयार दिख रहे हैं। ठाकरे ने कहा, ‘‘ शिवसेना का जन्म किसी और पार्टी में विलय करने के लिए नहीं हुआ था। इसे मराठी लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने और हिंदुत्व की रक्षा करने के लिए बनाया गया था।’’ उन्होंने दावा किया कि 2019 में उन्होंने ज़िम्मेदारी की भावना के कारण मुख्यमंत्री का पद स्वीकार किया था, क्योंकि भाजपा ने एकजुट शिवसेना के साथ ‘‘धोखा’’ किया था। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर भी निशाना साधा, जो अक्सर उनके काम करने के तरीके और पार्टी कार्यकर्ताओं व आम लोगों से उनकी कथित दूरी की आलोचना करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने और राज्य भर में यात्रा करने के लिए बाहर नहीं निकलता, तो वे सभी चुनाव कैसे जीतते? लोकसभा चुनाव के दौरान, मैंने हर निर्वाचन क्षेत्र में सात से दस बैठकें कीं। वे (बागी नेता) शिव सैनिकों और मतदाताओं के भरोसे की वजह से ही सांसद बने।’’
ठाकरे ने दावा किया कि देश ‘‘एक पार्टी, कोई चुनाव नहीं’’ वाली राह पर बढ़ रहा है, जो लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि भाजपा की ‘‘दलबदल कराने की राजनीति’’ लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है और चेतावनी दी कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों का भरोसा कम हो रहा है।



