TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए सांसदों के समूह को मान्यता देने के मुद्दे पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेंगे. सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष पहले बागी सांसदों और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट, दोनों का पक्ष सुनेंगे और उसके बाद कानूनी सलाह के आधार पर फैसला करेंगे. बताया जा रहा है कि TMC में पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच लोकसभा अध्यक्ष इस पूरे मामले पर संवैधानिक और कानूनी पहलुओं का गहन परीक्षण कराना चाहते हैं. इस पर अंतिम निर्णय संसद के मानसून सत्र से पहले लिया जा सकता है. जो आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है.
अभिषेक बनर्जी को मिलने के लिए भेजा था ईमेल
TMC सूत्रों का दावा है कि सांसद अभिषेक बनर्जी को लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय से मुलाकात के लिए 15 जून को दोपहर करीब 2 बजे भेजे गए ईमेल में शाम 4 बजे स्पीकर से मिलने के लिए कहा गया था। इसके बाद टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने अध्यक्ष कार्यालय को बताया कि अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं और उपस्थित नहीं हो सकते.
कानूनी राय के बाद होगा फैसला
संसदीय सूत्रों के मुताबिक, स्पीकर इस मामले में केंद्रीय विधि मंत्रालय की लिखित राय के आधार पर फैसला लिया जाएगा. मंत्रालय किसी वरिष्ठ विधि अधिकारी से परामर्श के बाद अपनी राय देगा. यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि भविष्य में यदि निर्णय को अदालत में चुनौती दी जाए तो वह न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर खरा उतर सके.
‘केवल पार्टी का आधिकारिक नेतृत्व ले सकता विलय का निर्णय’
लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पी.डी.टी. आचारी ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार केवल कोई राजनीतिक दल ही दूसरे दल में विलय कर सकता है. सांसद या विधायक अपने स्तर पर किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकते. उनका कहना है कि यदि किसी पार्टी का आधिकारिक नेतृत्व विलय का निर्णय लेता है, तभी उसके निर्वाचित प्रतिनिधि उस विलय का हिस्सा बन सकते हैं.
बागी सांसदों का दावा- 20 सांसद साथ
रविवार को टीएमसी से अलग हुए सांसदों ने दावा किया कि उनके साथ पार्टी के 20 सांसद हैं. बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है. उन्होंने यह भी कहा कि उनका समूह नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय करेगा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करेगा.
क्या है एनसीपीआई?
एनसीपीआई का पंजीकरण जनवरी 2023 में एक राजनीतिक दल के रूप में हुआ था. चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में स्थित है. अब टीएमसी के बागी सांसदों के समर्थन के दावे के बाद यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है. फिलहाल पूरे मामले पर सबकी नजर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि उनका निर्णय न केवल टीएमसी बल्कि संसद की राजनीतिक समीकरणों पर भी बड़ा असर डाल सकता है.
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