बेंगलुरु/चामराजनगर। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इसी बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार का बयान सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर गया है। मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर शिवकुमार ने सिर्फ इतना कहा, “समय बताएगा।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे हो चुके हैं और पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन तथा मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान जल्द ही मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार को दिल्ली बुलाकर इस मुद्दे पर बातचीत कर सकता है। दरअसल, शिवकुमार समर्थक लंबे समय से यह दावा कर रहे हैं कि 2023 विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सत्ता-साझेदारी का फार्मूला तय हुआ था। ऐसे में अब उनके मुख्यमंत्री बनने की अटकलें फिर तेज हो गई हैं। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
संभावना जताई जा रही है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर चल रही रस्साकशी को लेकर सौहार्दपूर्ण चर्चा और समाधान के लिए जल्द ही नयी दिल्ली तलब कर सकता है। शिवकुमार ने चामराजनगर में संवाददाताओं द्वारा उनके मुख्यमंत्री बनने को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा, ‘‘समय बताएगा’’। शिवकुमार के समर्थक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पार्टी द्वारा 2023 के विधानसभा चुनाव जीतने पर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के साथ हुए कथित सत्ता-साझेदारी समझौते के अनुरूप उन्हें राज्य सरकार की कमान सौंपी जाए।
इस बीच, बेंगलुरु में गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि अगर मामला कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष आता है तो वह मुख्यमंत्री को बदलने को लेकर स्थिति स्पष्ट करेगा। परमेश्वर से संवाददताओं से सवाल किया कि कांग्रेस आला कमान नेतृत्व परिवर्तन पर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा। इसके जवाब में उन्होंने कहा,‘‘बेवजह, वे ऐसा क्यों करेंगे? बदलाव का सवाल किसने उठाया है? कल खुद उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी बदलाव की मांग नहीं की है। यह सवाल कहां से आया? ऐसा सवाल किसने पूछा है?’’
उन्होंने कहा, पार्टी में आला कमान है और वही तय करेगा कि क्या करना है और कब करना है। मीडिया में बयान देने से कुछ हासिल नहीं होगा। फैसला आला कमान को करना है। मुख्यमंत्री को बदलने या उन्हें पद पर बनाए रखने के प्रस्ताव पर चर्चा करने का क्या फायदा? हम यहां बैठकर इस मामले का फैसला नहीं करने वाले हैं। परमेश्वर ने कहा कि जहां तक उन्हें जानकारी है, सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री बनाए जाने के दौरान कोई समय सीमा तय नहीं की गई थी।



