नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक अपेक्षित समर्थन हासिल न कर पाने के कारण पारित नहीं हो सका। मतदान के दौरान इस बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। हालांकि, यह संख्या पर्याप्त नहीं थी, क्योंकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार इस तरह के विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में पूरी नहीं हो पाई।
इस विधेयक को महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा था। लंबे समय से इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा होती रही है। कई दलों और संगठनों ने इसे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए जरूरी बताया था, वहीं कुछ राजनीतिक दलों ने इसके प्रावधानों पर आपत्ति भी जताई थी।
यह खबर भी पढ़ें: अशोक खरात केस में बड़ा मोड़: प्रमुख गवाह और उनकी पत्नी की दर्दनाक मौत
मतदान के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि संसद में इस मुद्दे पर अभी भी पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है। समर्थन में मिले वोटों की संख्या भले ही विरोध से अधिक रही, लेकिन जरूरी बहुमत के अभाव में यह विधेयक कानून का रूप नहीं ले सका। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस परिणाम के बाद महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर बहस के केंद्र में आ सकता है। आने वाले समय में सरकार और विपक्ष के बीच इस पर और चर्चा होने की संभावना है, ताकि सहमति बनाकर इसे फिर से पेश किया जा सके।
फिलहाल, इस बिल के पारित न होने से महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में आरक्षण देने की दिशा में एक बड़ा झटका माना जा रहा है।



