Dharmendra Pradhan Parliament : नई दिल्ली। छात्रों के विरोध के बीच शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में भाजपा सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए ‘प्रधान जिंदाबाद’ के नारे लगाए, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया।
विपक्षी सांसदों ने लगाया पेपर चोर के नारे
भाजपा सांसदों द्वारा प्रधान का स्वागत किए जाने के समय ही कुछ दूरी पर मौजूद विपक्षी सांसदों ने ‘‘चोर-चोर, पेपर चोर’’ जैसे नारे लगाए। प्रधान इस्तीफे के बाद सोमवार को पहली बार संसद पहुंचे थे। वह जब संसद परिसर में पहुंचे तो ‘मकर द्वार’ के निकट मौजूद भाजपा के कुछ सांसदों ने उनका स्वागत किया और ‘प्रधान जिंदाबाद’ के नारे लगाए।
बिहार के दरभंगा से भाजपा के लोकसभा सदस्य गोपाल जी ठाकुर ने उन्हें ‘पाग’ (मिथिला की पारंपरिक टोपी) पहनाकर उनका स्वागत किया। विपक्षी नेताओं ने प्रधान के सम्मान को लेकर सत्तारूढ़ दल पर तीखा हमला बोला। संसद परिसर में प्रधान के स्वागत के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, ये वही लोग हैं जिन्होंने बिलकिस बानो मामले में बलात्कार के दोषियों का भी स्वागत किया था, इसलिए इन्हें छोड़ दीजिए। प्रधान आरएसएस के नायक हैं क्योंकि उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के माध्यम से आरएसएस के एजेंडे को लागू किया। इसलिए वह उनके नायक हैं। लेकिन जहां तक प्रधान का सवाल है, लोग अब उनका असली चेहरा जान चुके हैं, जैसा कि हम सोशल मीडिया और सड़कों पर देख सकते हैं।

भाजपा ‘दिखावटी विधेयक’ विधेयक लेकर आई है : गौरव गोगोई
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर ‘‘गंभीर नहीं’’ है और उन्होंने पेपर लीक रोधी विधेयक को ‘‘दिखावटी विधेयक’’ करार दिया। गोगोई ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह सरकार भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है। इसलिए वह एक दिखावटी विधेयक लेकर आई है। हम पहले से जानते हैं कि पिछले एक मामले में मुख्य आरोपी को अदालत ने छोड़ दिया, क्योंकि पर्याप्त सबूत जुटाए ही नहीं गए थे। ऐसे में इस फास्ट-ट्रैक संशोधन विधेयक का क्या फायदा, जब भाजपा सरकार ऐसे सभी घोटालों में शामिल लोगों को बचाने पर तुली हुई है।’’
गोगोई ने शिक्षा सुधारों पर सरकार द्वारा नए उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल के गठन की घोषणा पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इसी तरह का एक पैनल दो साल पहले के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित किया गया था, लेकिन ‘‘कुछ नहीं हुआ’’ और वह ‘‘सिर्फ कागजों पर’’ रह गया।



