नई दिल्ली (प्रज्ञा पांडे)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला किया गया। वहीं, ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज भी संदिग्ध हमले की चपेट में आया है। हालांकि, इन दोनों घटनाओं की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मंगलवार सुबह कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य बेस पर कम से कम तीन ड्रोन से हमला किया। फिलहाल अमेरिका और कुवैत की ओर से किसी नुकसान, सैन्य क्षति या हताहत की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में हमले से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है।
ओमान के पास मालवाहक जहाज पर संदिग्ध हमला
तनाव के बीच ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने जानकारी दी कि ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब एक मालवाहक जहाज अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया। एजेंसी ने मामले की जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। इन घटनाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को समझौते के लिए “आखिरी मौका” बताया है। ट्रम्प ने कहा कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए, तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने ईरान पर बातचीत को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया।
ईरान ने अमेरिका से सीधी बातचीत से किया इनकार
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रत्यक्ष वार्ता की खबरों को खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर उसकी बातचीत केवल ओमान के साथ हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत के लिए पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की मध्यस्थता पर चर्चा चल रही है, लेकिन अब तक किसी तारीख या स्थान की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
IRGC का MQ-9 रीपर ड्रोन गिराने का दावा
ईरान की IRGC ने यह भी दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ रहे एक MQ-9 रीपर ड्रोन को एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया। हालांकि, ईरान ने यह नहीं बताया कि ड्रोन किस देश का था और इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिम के बीच रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के छह सुपरटैंकरों ने अपना समुद्री मार्ग बदल लिया है। हूती विद्रोहियों की संभावित धमकियों को देखते हुए इन जहाजों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब मार्ग से बचते हुए अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा रास्ता चुना है। इससे वैश्विक शिपिंग लागत और तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
तेल की कीमतों में आई तेजी
अमेरिका-ईरान तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी देखने को मिला। ब्रेंट और WTI क्रूड की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग प्रभावित होती है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल कुवैत स्थित अमेरिकी बेस पर कथित ड्रोन हमले, ओमान के पास जहाज पर हमले और MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित देशों की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है। हालांकि, इन घटनाओं ने एक बार फिर खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।



