नई दिल्ली। बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी बीसीआई के चेयरमैन के कार्यकाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पांच साल के कार्यकाल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा पदाधिकारी के कार्यकाल को सीधे वर्ष 2030 तक जारी रहने वाला नियमित कार्यकाल नहीं माना जा सकता। फिलहाल उन्हें अंतरिम व्यवस्था के तहत जिम्मेदारी निभाने की बात कही गई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बीसीआई के कामकाज और उसके प्रशासनिक ढांचे से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि जब तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया का पुनर्गठन नहीं हो जाता, तब तक संस्था के महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों पर भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की निगरानी रहेगी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को बीसीआई के रोजाना के प्रशासनिक काम में शामिल होने की जरूरत नहीं होगी। उनकी भूमिका मुख्य रूप से बड़े नीतिगत फैसलों की निगरानी तक सीमित रहेगी।
मामले में सबसे अहम सवाल चेयरमैन और उपाध्यक्ष के कार्यकाल को लेकर उठा। अदालत के सामने दलील रखी गई कि बीसीआई के मौजूदा नियमों में इन पदों के लिए दो साल की अवधि तय है। इसके बावजूद वर्ष 2025 में एक प्रस्ताव के जरिए चेयरमैन के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने की व्यवस्था की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने इसी व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया। अदालत ने पूछा कि अगर नियमों में दो साल की अवधि निर्धारित है, तो महज एक प्रस्ताव के जरिए इसे बढ़ाकर पांच साल कैसे किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि उत्तराधिकारी के चुने जाने तक पद पर बने रहने का प्रावधान किसी पदाधिकारी को स्वतः पांच साल का स्थायी कार्यकाल नहीं दे सकता।
सुनवाई के दौरान बीसीआई के पुनर्गठन का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने राज्य बार काउंसिलों के चुनाव और नए प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इन्हीं प्रतिनिधियों के माध्यम से आगे बीसीआई के नए नेतृत्व के चुनाव का रास्ता तैयार होगा।
इसके अलावा बीसीआई से जुड़े एक ट्रस्ट की संरचना पर भी अदालत ने सवाल उठाया। कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या एक निर्वाचित संस्था के संसाधनों से बने ट्रस्ट में ऐसे लोगों को स्थायी रूप से ट्रस्टी बनाया जा सकता है, जो बाद में उस संस्था के निर्वाचित पद पर न रहें।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों के पुनर्गठन के लिए करीब चार सप्ताह का कार्यक्रम तय किया है। इसके बाद बीसीआई के नए गठन और नेतृत्व को लेकर आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी। मामले पर अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।



