जयपुर। राजस्थान के 309 निकायों के नतीजों ने प्रदेश की शहरी राजनीति की पूरी तस्वीर साफ कर दी है। इन नतीजों ने साफ कर दिया कि ‘भजनलाल शर्मा का गवर्नेंस मॉडल’ किस तरह पूर्व मुख्यमंत्री ‘अशोक गहलोत के सियासी किले’ में सेंध लगाने में कामयाब रहा। अगर हम अशोक गहलोत के कार्यकाल (2019-2021) के निकाय नतीजों की तुलना 2026 में आए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के जनादेश से करें, तो राजस्थान के शहरों में सत्ता का संतुलन साफ तौर पर बदलता हुआ नजर आता है।
नगर निगम की जंग: गहलोत का दांव पड़ा उल्टा, 10 में से 9 निगमों पर BJP का दबदबा
अपने पिछले कार्यकाल में अशोक गहलोत ने जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों को दो हिस्सों में बांटकर कांग्रेस का मेयर बनाने का बड़ा दांव खेला था। उस वक्त यह रणनीति कारगर भी रही थी, लेकिन 2026 के नतीजों ने उस पूरे समीकरण को पलट दिया है।
- भजनलाल सरकार (2026): इस बार बीजेपी ने 10 में से 6 नगर निगमों (अलवर, भरतपुर, अजमेर, उदयपुर, पाली और भीलवाड़ा) में सीधी और एकतरफा जीत हासिल की है। इसके अलावा जयपुर, जोधपुर और कोटा में भी बहुमत के साथ बीजेपी का बोर्ड बनना तय माना जा रहा है। कांग्रेस के हाथ सिर्फ बीकानेर नगर निगम (42/80 सीटें) ही लग सका, जहां वह किसी तरह अपना बोर्ड बचा पाई।
- गहलोत सरकार (2019-21): इसके उलट, पिछले चुनाव में कांग्रेस ने जयपुर हेरिटेज, जोधपुर उत्तर और कोटा उत्तर में अपने मेयर बनाकर बीजेपी के पारंपरिक शहरी वोट बैंक को बड़ा झटका दिया था।
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नगर परिषद और पालिकाओं में किसका पलड़ा भारी?
सिर्फ बड़े शहर ही नहीं, बल्कि छोटे कस्बों और नगर पालिकाओं में भी राजनीतिक जमीन खिसकती हुई दिखी है:
- नगर परिषद: गहलोत राज में कांग्रेस का 27 नगर परिषदों पर कब्जा था। लेकिन नए परिसीमन के बाद बनी 31 नगर परिषदों में से बीजेपी ने 18 पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस घटकर 13 पर सिमट गई।
- नगर पालिका: पिछली बार 123 पालिकाओं में से कांग्रेस ने 48 पर कब्जा किया था। इस बार कुल 163 पालिकाओं में से बीजेपी ने 83 में बाजी मारी, जबकि कांग्रेस 80 के आंकड़े तक ही पहुंच पाई।
वोट शेयर का असली गणित: सिर्फ 0.97% के अंतर ने पलट दी बाजी
राजनीति में सीटों के साथ-साथ वोट प्रतिशत ही असली कहानी बयान करता है। जब हम दोनों मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल का तुलनात्मक अध्ययन करते हैं, तो वोटों का गणित कुछ इस प्रकार दिखता है:
| चुनावी पैमाना | अशोक गहलोत कार्यकाल (2019-21) | भजनलाल शर्मा कार्यकाल (2026) |
| बीजेपी का वोट % (सीटें) | 32.39% (35.7% सीटें) | 36.11% (40.8% सीटें) |
| कांग्रेस का वोट % (सीटें) | 37.20% (40.7% सीटें) | 35.14% (35.3% सीटें) |
| नतीजा / लीड | कांग्रेस +4.81% की बढ़त पर थी | बीजेपी +0.97% से भारी पड़ी |
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सीएम भजनलाल का ‘स्ट्राइक रेट’ बेहतर, पर गहलोत का वोट बैंक भी बरकरार
आंकड़ों की कसौटी पर कसें तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्पष्ट रूप से बढ़त बनाते दिखते हैं। उन्होंने न केवल बीजेपी के वोट बैंक को 32.39% से बढ़ाकर 36.11% तक पहुंचाया, बल्कि नगर निगमों में कांग्रेस के दबदबे को भी पूरी तरह खत्म कर दिया।
हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह भी है कि अशोक गहलोत का कोर वोट बैंक पूरी तरह से नहीं बिखरा। कांग्रेस का 35.14% वोट शेयर यह साबित करता है कि राजस्थान के शहरों में जमीनी मुकाबला अभी भी कांटे का है। लेकिन ऐन वक्त की रणनीति, माइक्रो-लेवल मैनेजमेंट और बूथ स्तर की जमावट के दम पर भजनलाल शर्मा यह बाजी मारने में पूरी तरह सफल रहे।



