नई दिल्ली। आसाराम के बेटे नारायण साईं को दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी उम्रकैद की सजा को निलंबित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। हालांकि अदालत ने गुजरात हाई कोर्ट से उनकी लंबित आपराधिक अपील पर जल्द सुनवाई कर निर्णय लेने का अनुरोध किया है। नारायण साईं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपील लंबित रहने तक उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी।
उनका कहना था कि वह लंबे समय से जेल में हैं और उनकी अपील पर अभी तक अंतिम फैसला नहीं आया है। उन्होंने इसी आधार पर सजा निलंबित करने की गुहार लगाई थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल ऐसे कोई पर्याप्त आधार नहीं हैं, जिनके चलते उम्रकैद की सजा पर रोक लगाई जा सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए इस स्तर पर राहत देना उचित नहीं होगा। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने गुजरात हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि नारायण साईं की लंबित अपील का यथाशीघ्र निस्तारण किया जाए।
अदालत ने दोनों पक्षों से भी अपील की सुनवाई के दौरान पूरा सहयोग करने को कहा, ताकि मामले का जल्द फैसला हो सके। यह मामला वर्ष 2013 में दर्ज दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ा है। ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद नारायण साईं को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने इस फैसले को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां उनकी अपील अभी भी लंबित है। हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद नारायण साईं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने भी उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
अब उनकी उम्मीद गुजरात हाई कोर्ट में लंबित अपील के अंतिम निर्णय पर टिकी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल नारायण साईं को जेल में ही रहना होगा। वहीं, अब गुजरात हाई कोर्ट में लंबित अपील की सुनवाई और उसके अंतिम फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



