Supreme Court On SIR: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा बिहार और पश्चिम बंगाल में कराए गए वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को वैध और संवैधानिक करार दिया है. शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है और यह संविधान तथा जनप्रतिनिधित्व कानून (RP Act) की कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है. अदालत ने अपने फैसले में कहा, ‘यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है. 11 दस्तावेजों पर विचार करने और हमारे आदेश के जरिए आधार कार्ड को शामिल किए जाने के बाद यह नहीं कहा जा सकता कि चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए दस्तावेज मनमाने हैं.’
SIR की प्रक्रिया रहेगी जारी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह कानून का पालन किया गया और चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग की सभी संवैधानिक शक्तियां बरकरार रहेंगी और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी. अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन सिर्फ इसी आधार पर पूरे SIR को अवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं.’
‘चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता’
अदालत ने यह भी माना कि SIR के दौरान चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कदम परिस्थितियों और जरूरत के मुताबिक थे. शीर्ष अदालत ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर किए जाने वाले काम को देखते हुए चुनाव आयोग को नियम और प्रक्रिया तय करने का अधिकार है. हालांकि शीर्ष अदालत ने यह साफ किया कि चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता, लेकिन संदिग्ध मामलों को केंद्र सरकार के पास भेज सकता है.
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