Monday, August 31, 2026
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65 के सुनील शेट्टी ने यंग एक्टर्स पर साधा निशाना! बोले- ‘मैं बच्चों से मुकाबला नहीं करता, झुर्रियों से शर्म नहीं’

65 साल की उम्र में भी सुनील शेट्टी बॉलीवुड में लगातार एक्टिव हैं। एक्टर ने बताया कि वह अपनी उम्र को छिपाने के बजाय स्वीकार करते हैं और यंग एक्टर्स से मुकाबला करने में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने झुर्रियों, फिटनेस, करियर और आज की फिल्मों में बढ़ती हिंसा पर भी खुलकर बात की।

मुंबई। बॉलीवुड के ‘अन्ना’ यानी सुनील शेट्टी 65 साल की उम्र में भी अपनी फिटनेस और दमदार पर्सनैलिटी के लिए जाने जाते हैं। 90 के दशक में एक्शन और माचो अंदाज से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले सुनील शेट्टी आज भी फिल्मों में एक्टिव हैं। हाल ही में वह ‘वेलकम टू द जंगल’ में नजर आए थे और अब टाइगर श्रॉफ के साथ एक एक्शन फिल्म में नजर आने की खबरें भी सामने आई हैं। लेकिन इतने लंबे करियर के बाद भी सुनील शेट्टी बॉलीवुड में लगातार कैसे रेलेवेंट बने हुए हैं? एक्टर ने हाल ही में LinkedIn पर एक पोस्ट के जरिए इसका जवाब दिया।

पहले परिवार के लिए कमाते थे, अब बदल गई प्राथमिकताएं

सुनील शेट्टी ने बताया कि उनके करियर के शुरुआती दौर में काम करने की सबसे बड़ी वजह पैसा था। वह अपने परिवार को बेहतर और आरामदायक जिंदगी देना चाहते थे। हालांकि, समय के साथ उनकी प्राथमिकताएं बदल गईं और अब वह पैसे की उसी दौड़ का हिस्सा नहीं हैं। एक्टर के मुताबिक, अब वह ऐसे प्रोजेक्ट्स चुनना पसंद करते हैं, जिनसे उन्हें खुद भी आगे बढ़ने का मौका मिले और लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

‘मैं आसानी से उपलब्ध नहीं होता’

65 की उम्र में भी अच्छे प्रोजेक्ट्स मिलने के पीछे सुनील शेट्टी ने अपनी सोच और काम करने के तरीके को बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि वह आसानी से उपलब्ध नहीं होते और उन्हीं लोगों के साथ काम करना पसंद करते हैं, जिनके साथ उन्हें लगता है कि वह कुछ बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने अपनी पॉजिटिव सोच को भी अपनी रेलेवेंस की बड़ी वजह बताया। सुनील के मुताबिक, वह आज अपनी जिंदगी में संतुष्ट, खुश और सिक्योर हैं। वह अपनी सफलताओं के साथ-साथ अपनी गलतियों और असफलताओं को भी स्वीकार करते हैं।

‘आधी उम्र के बच्चों से मुकाबला करने का कोई मतलब नहीं’

सुनील शेट्टी ने उम्र को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी अपनी उम्र से भागने की कोशिश नहीं की। उनके मुताबिक, उम्र के हिसाब से रोल स्वीकार करना उनके लंबे करियर की अहम वजह है। उन्होंने साफ कहा कि आधी उम्र के यंग एक्टर्स से मुकाबला करने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि वे उनसे बेहतर दिख सकते हैं, बेहतर बॉडी बना सकते हैं और अपने काम में माहिर हैं। सुनील का मानना है कि अपनी उम्र और अनुभव को स्वीकार करना ही ज्यादा बेहतर है, बजाय इसके कि वह युवा कलाकारों के साथ उसी स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश करें।

झुर्रियों से नहीं है शर्म

एक्टर ने बढ़ती उम्र और शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर भी बेबाक अंदाज अपनाया। उन्होंने कहा कि वह लगातार खुद पर काम करते हैं, लेकिन इसे ‘एंटी एजिंग’ नहीं कहते। उनका मानना है कि उन्होंने अपनी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को कुछ हद तक धीमा जरूर किया है। सुनील ने यह भी कहा कि झुर्रियां हमेशा रहेंगी और अब ये उनकी जिंदगी का हिस्सा हैं। उनके लिए उम्र को छिपाना नहीं बल्कि उसे स्वीकार करना ज्यादा जरूरी है।

पति, पिता और दादा का रोल भी खुशी से स्वीकार किया

सुनील शेट्टी ने जिंदगी के अलग-अलग किरदारों को भी इसी सोच के साथ स्वीकार किया है। चाहे पति का रोल हो, बेटे का, पिता का या फिर दादा का- उन्होंने जीवन में मिले हर किरदार को खुले दिल से अपनाया है। उनका कहना है कि समय के साथ शरीर में जो बदलाव आते हैं, उन्हें स्वीकार करना जिंदगी का हिस्सा है।

आज की फिल्मों में बढ़ती हिंसा से परेशान हैं सुनील

सुनील शेट्टी ने आज की फिल्मों के एक्शन को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्हें फिल्मों में दिखाई जाने वाली अत्यधिक हिंसा और खून-खराबा पसंद नहीं है। उनके मुताबिक, आज एक्शन को ज्यादा से ज्यादा रियल और ग्राफिक दिखाने की कोशिश की जाती है। उनका मानना है कि 90 के दशक की फिल्मों में एक्शन इतना ग्राफिक नहीं होता था। उन्होंने कहा कि कई बार आज के एक्शन सीक्वेंस को पूरा देखना भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि उनमें हिंसा और खून-खराबा काफी ज्यादा होता है।

65 की उम्र में भी जारी है ‘अन्ना’ की रफ्तार

सुनील शेट्टी का लंबा फिल्मी सफर इस बात की मिसाल है कि इंडस्ट्री में लंबे समय तक टिके रहने के लिए सिर्फ स्टारडम या जवानी जरूरी नहीं है। बदलते वक्त के साथ खुद को ढालना, अपनी उम्र को स्वीकार करना और सही प्रोजेक्ट्स चुनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जहां करियर के शुरुआती दौर में पैसा सुनील शेट्टी की सबसे बड़ी प्राथमिकता था, वहीं आज वह काम की क्वालिटी, खुशी और सकारात्मक प्रभाव को ज्यादा महत्व देते हैं। यही सोच शायद 65 की उम्र में भी उन्हें बॉलीवुड में प्रासंगिक बनाए हुए है।

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