जयपुर। जयपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर शांति एवं अहिंसा विभाग और राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने संयुक्त रूप से विशेष संगोष्ठी आयोजित की, जिसमें उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई। शांति एवं अहिंसा विभाग के निदेशक अजय असवाल ने बताया कि केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के निर्देशानुसार 1 से 15 जुलाई तक प्रदेशभर में ‘प्रेरणा पखवाड़ा’ आयोजित किया जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय की स्मरणोत्सव श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी मुख्य अतिथि रहे।
अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीति में राष्ट्र प्रथम की भावना के अनन्य उपासक, अद्वितीय शिक्षाविद् तथा अखंड भारत के सच्चे शिल्पकार थे। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए समर्पित रहा तथा उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी देश की संप्रभुता और स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त प्रचारक श्री बाबूलाल ने डॉ. मुखर्जी के वैचारिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा को सशक्त स्वर प्रदान किया तथा भारतीय जनसंघ की स्थापना के माध्यम से वैचारिक दिशा दी।
विशिष्ट अतिथि हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की संप्रभुता और जनहित के लिए संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष किया। उनका जीवन राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने शिक्षा में भारतीय मूल्यों तथा आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा जैसी स्वदेशी विधाओं के समावेश की जो आधारशिला रखी, उसी दिशा में आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं आयुष के क्षेत्र में देश आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में मधु रघुवंशी उपनिदेशक शांति एवं अहिसा निदेशालय एवं चंद्रशेखर शर्मा उपनिदेशक, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान सहित अनेक शिक्षाविद्, प्रबुद्ध नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। शांति एवं अहिंसा निदेशालय की ओर से अतिथियों का स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र शर्मा ‘हंस’ द्वारा किया गया।



