टोक्यो। रूस और जापान के बीच लंबे समय से चल रहा क्षेत्रीय विवाद एक बार फिर गहरा गया है। रूस ने विवादित कुरील द्वीप समूह के आसपास बड़े पैमाने पर मिसाइल अभ्यास कर अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, जिसके बाद जापान ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। रूसी प्रशांत बेड़े की ओर से किए गए इस सैन्य अभ्यास में युद्धपोतों, परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियों और तटीय मिसाइल प्रणालियों को शामिल किया गया। अभ्यास के दौरान समुद्र में मौजूद काल्पनिक दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई मिसाइलें दागी गईं। रूसी सेना का दावा है कि सभी लक्ष्य सफलतापूर्वक भेदे गए।
बताया जा रहा है कि यह अभ्यास रूस के व्यापक नौसैनिक अभियान का हिस्सा है, जिसमें दर्जनों युद्धपोत, पनडुब्बियां, सैन्य विमान और हजारों सैनिक शामिल हैं। रूस का कहना है कि बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए उसकी सैन्य तैयारियां आवश्यक हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कुरील द्वीप समूह के एक प्रमुख द्वीप का दौरा किया था। इस दौरे को लेकर भी जापान ने नाराजगी व्यक्त की थी। पुतिन की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव पहले ही बढ़ चुका था। कुरील द्वीपों को लेकर रूस और जापान के बीच दशकों पुराना विवाद है।
द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में सोवियत संघ ने इन द्वीपों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था। जापान आज भी इन द्वीपों पर अपना दावा करता है और उन्हें अपने उत्तरी क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि रूस इन्हें अपने क्षेत्र का अभिन्न अंग बताता है। जापान सरकार ने रूस की ताजा सैन्य गतिविधियों को अस्वीकार्य बताते हुए चिंता व्यक्त की है। जापानी अधिकारियों का कहना है कि विवादित क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ठीक संकेत नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की यह कार्रवाई एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपनी सैन्य क्षमता दिखाने का प्रयास है।
वहीं जापान इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि को अपने हितों के खिलाफ मानता है। कुरील द्वीप विवाद दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा अनसुलझा मुद्दा बना हुआ है। यही कारण है कि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के कई दशक बाद भी रूस और जापान के बीच औपचारिक शांति संधि नहीं हो सकी है। ताजा मिसाइल अभ्यास ने इस पुराने विवाद को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।



