जयपुर। राजस्थान की सियासत में इन दिनों बगावती तेवर और तीखे सवालों का दौर चल रहा है। पाली में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष को घेरने के बाद अब शिव के निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर तीखा हमला बोला है। भाटी ने सरकारी कार्यक्रमों में पानी की तरह पैसा बहाने पर सवाल खड़े किए हैं। इतना ही नहीं, प्रदेश में चल रही पंचायती राज चुनाव की सरगर्मी के बीच भाटी ने पंचायत चुनावों में भी अपनी एंट्री के साफ संकेत दे दिए हैं।
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सीएम के कार्यक्रम पर भाटी का तीखा प्रहार: “20 करोड़ फूंक दिए”
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दौरे और खर्च को आड़े हाथों लेते हुए विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। भाटी ने तंज कसते हुए कहा, “पशु चारे के लिए एक-एक करोड़ रुपए दिए गए हैं, लेकिन जरा यह भी सोचिए कि उस अकेले कार्यक्रम में 20 करोड़ रुपए फूंक दिए गए! वहां जो डोम लगे और भीड़ जुटाई गई, वह पैसा किसका था? वह जनता की और हमारी-आपकी जेब का पैसा था।”
भाटी ने सरकार पर प्रशासनिक अमले के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि पटवारी, टीचर्स, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और नरेगा मजदूरों को बसों में भरकर भीड़ जुटाने के लिए जो तेल जलाया गया, क्या वह जनता की गाढ़ी कमाई नहीं थी? उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार को 20-25 करोड़ रुपए खर्च ही करने थे, तो सूबे के अकाल पीड़ित इलाकों और किसानों की मदद में लगाते, तब जाकर कोई धर्म का काम होता।
क्या पंचायत चुनाव में उतरेंगे रविंद्र सिंह भाटी?
एक तरफ जहां भाटी सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान में होने जा रहे 2026 के पंचायत चुनावों को लेकर उनकी रणनीति भी चर्चा का विषय बन गई है। जब भाटी से यह सवाल किया गया कि क्या वे आगामी पंचायती राज चुनावों में उतरेंगे, तो उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि अगर जनता और उनके समर्थक आदेश देंगे, तो अपने उम्मीदवार मैदान में जरूर उतारे जाएंगे।
हाल ही में ‘ईडब्ल्यूएस सरलीकरण यात्रा’ को लेकर पूरे प्रदेश में सुर्खियों में रहे भाटी ने कहा कि गांवों और ढाणियों से लगातार उनके पास आवाज आ रही है। यदि जमीन पर जनता की यही मांग रही, तो वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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बीजेपी और कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें
नरेश मीणा के बाद अब रविंद्र सिंह भाटी के भी पंचायत चुनावों में सक्रिय होने के संकेतों ने ग्रामीण सियासत का पारा हाई कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर भाटी समर्थित उम्मीदवारों ने ग्रामीण चुनावों में ताल ठोक दी, तो राजस्थान के गांवों की सरकार में बीजेपी और कांग्रेस दोनों पारंपरिक दलों के समीकरण बुरी तरह गड़बड़ा सकते हैं।



