अयोध्या। राम मंदिर के दान से जुड़े कथित गबन मामले ने नया मोड़ ले लिया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने एक अहम निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि उसके सदस्य इस प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों की ओर से अदालत में पैरवी नहीं करेंगे। बार एसोसिएशन का कहना है कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से यह फैसला लिया है।
जानकारी के अनुसार, एसोसिएशन की आम बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में यह भी कहा गया कि यदि कोई सदस्य इस मामले में आरोपियों की ओर से वकालत करता है, तो उसके विरुद्ध संगठनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराने की मांग भी उठाई गई। बार एसोसिएशन ने राम मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ प्रमुख पदाधिकारियों के संबंध में भी गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने मांग की कि मामले में उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। इस बीच, पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है और मामले की जांच जारी है। जांच एजेंसियां दान राशि के प्रबंधन, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान राशि में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद इस मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि निष्पक्ष जांच और पारदर्शी प्रक्रिया से ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद मंदिर प्रशासन और संबंधित संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर भी सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई है।



