जयपुर। राजस्थान में आगामी पंचायतीराज चुनाव की सरगर्मियों के बीच सियासी पारा तेजी से चढ़ने लगा है। चुनाव की आधिकारिक घोषणा से ठीक पहले संभावित उम्मीदवारों के डेटा और सूचियों को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दावा किया है, जिस पर भाजपा ने भी तीखा पलटवार किया है।
कांग्रेस का गंभीर आरोप: सरकारी मशीनरी का हो रहा है दुरुपयोग
विवाद की शुरुआत कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के बयानों से हुई। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को आड़े हाथों लिया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सवाल उठाया कि जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के संभावित उम्मीदवारों की जानकारी आखिर किस उद्देश्य से और किसके आदेश पर मांगी जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधिकारियों पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या यह कोई सरकारी काम है, जिसके लिए प्रशासनिक अमले का इस्तेमाल किया जा रहा है? जूली ने इस पूरे मामले में राज्य निर्वाचन आयोग से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की।
वहीं, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने जिला कलेक्टर का एक पत्र सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठे अधिकारी सत्ता के अहंकार में इस तरह के आदेश जारी करवा रहे हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का तीखा पलटवार
कांग्रेस के इन तमाम आरोपों पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने जोरदार पलटवार किया है। राठौड़ ने कांग्रेस के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल ‘भ्रम फैलाने का असफल प्रयास’ करार दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि भाजपा को संभावित उम्मीदवारों की सूची जुटाने के लिए किसी भी सरकारी मशीनरी या तंत्र के सहारे की कोई आवश्यकता नहीं है। पार्टी का अपना एक बहुत मजबूत और व्यापक संगठनात्मक नेटवर्क मौजूद है, जिसके बूते पार्टी हर चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार रहती है।



