जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पहले जहां जुलाई के अंत तक चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं अब आरक्षण प्रक्रिया में देरी और मानसून की वजह से चुनाव सितंबर या अक्टूबर तक टलने की संभावना बढ़ गई है। प्रशासनिक स्तर पर भी इसे लेकर मंथन जारी है।
हाईकोर्ट ने 31 जुलाई तक चुनाव कराने के दिए थे निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई को राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए थे कि पंचायती राज और नगर निकायों के आम चुनाव की पूरी प्रक्रिया 31 जुलाई तक हर हाल में पूरी की जाए। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को आरक्षण प्रक्रिया जल्द पूरी करने के लिए पत्र भी भेजा था।
हालांकि ग्राम पंचायतों से लेकर नगर निगमों तक वार्डों का पुनर्गठन लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग के लिए सीटों का अंतिम आरक्षण अभी तक घोषित नहीं किया गया है। जब तक सरकार आरक्षण की अंतिम अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं कर सकता।
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मानसून बना सबसे बड़ी चुनौती
चुनाव में देरी की दूसरी बड़ी वजह मानसून को माना जा रहा है। जुलाई और अगस्त के दौरान राजस्थान के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान कराना, पोलिंग पार्टियों को दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाना और चुनावी व्यवस्थाओं का संचालन प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
बारिश के कारण मतदान प्रतिशत प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। यही वजह है कि प्रशासनिक स्तर पर सितंबर या अक्टूबर को चुनाव कराने का विकल्प अधिक व्यावहारिक माना जा रहा है।
निर्वाचन आयोग तैयार, सरकार के फैसले का इंतजार
राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि चुनाव कराने की अधिकांश तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मतदाता सूचियों का कार्य अंतिम चरण में है और आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार है। हालांकि अंतिम कार्यक्रम तभी घोषित किया जा सकेगा, जब राज्य सरकार आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर अंतिम प्रस्ताव आयोग को सौंप देगी।
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सरकार के सामने बड़ी चुनौती
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्य सरकार हाईकोर्ट की तय समय सीमा के भीतर आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर पाएगी या फिर मानसून और प्रशासनिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अदालत से अतिरिक्त समय मांगा जाएगा। फिलहाल प्रदेशभर में पंचायत और नगर निकाय चुनाव की तारीखों को लेकर राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों की निगाहें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं। आने वाले कुछ दिनों में सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की बैठकें चुनावी कार्यक्रम की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।



