जयपुर। राजस्थान में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा का इंतजार अभी जारी है, लेकिन स्वायत्त शासन राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा के ताजा बयान ने चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। सीकर में भाजपा की संगठनात्मक बैठक के दौरान उन्होंने संकेत दिया कि इस बार नगर निगम के मेयर, नगर परिषद के सभापति और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता के वोट से नहीं, बल्कि निर्वाचित पार्षदों के जरिए कराया जाएगा।
मंत्री के इस बयान को राज्य सरकार की संभावित चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। यदि यही व्यवस्था लागू होती है तो राजस्थान में निकाय प्रमुखों के चुनाव की पुरानी प्रणाली फिर से लागू हो जाएगी।
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सीधे चुनाव की व्यवस्था पर उठे सवाल
झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि पहले जब निकाय प्रमुखों का सीधा चुनाव कराया गया था, तब कई नगर निकायों में ऐसी स्थिति बनी, जहां मेयर या चेयरमैन एक राजनीतिक दल से थे, जबकि अधिकांश पार्षद किसी दूसरे दल से चुने गए। इस कारण पूरे कार्यकाल के दौरान टकराव की स्थिति बनी रही और विकास कार्य प्रभावित हुए।
उन्होंने कहा कि निकायों के बेहतर संचालन के लिए जरूरी है कि बोर्ड और उसका नेतृत्व एक ही दिशा में काम करें। इसी सोच के तहत सरकार पार्षदों द्वारा निकाय प्रमुख चुनने की व्यवस्था को अधिक प्रभावी मान रही है।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बाद बढ़ेगी चुनावी प्रक्रिया
निकाय और पंचायती राज चुनावों में हुई देरी पर मंत्री ने कहा कि ओबीसी आरक्षण से जुड़े ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक था। इसके लिए गठित ओबीसी आयोग ने अपना सर्वे पूरा कर रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी है। अब इस रिपोर्ट पर राज्य मंत्रिमंडल विचार करेगा, जिसके बाद आरक्षण और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अगले फैसले लिए जाएंगे। सरकार का मानना है कि कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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भाजपा ने कार्यकर्ताओं को दिया साफ संदेश
सीकर में आयोजित संगठनात्मक बैठक में भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों में जुटने का आह्वान किया। पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया कि निकाय चुनाव में टिकट उन्हीं कार्यकर्ताओं को मिलेगा, जिन्होंने लंबे समय तक संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है।
बैठक में यह भी कहा गया कि व्यक्तिगत दावेदारी से ऊपर उठकर सभी कार्यकर्ता पार्टी के चुनाव चिन्ह “कमल” को ही उम्मीदवार मानकर चुनाव लड़ें और जिताने के लिए एकजुट होकर काम करें। संगठन ने इस दौरान स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों से चुनावी फीडबैक भी लिया।
निकाय चुनाव को लेकर सरकार की ओर से अभी अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन मंत्री के बयान के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि इस बार चुनावी व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।



