जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थर्ड ग्रेड शिक्षकों ने आखिरकार धरना समाप्त करने का फैसला कर लिया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा की। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि राज्य में जल्द ही नई स्थानांतरण नीति लागू की जाएगी, जिससे लंबे समय से तबादलों का इंतजार कर रहे शिक्षकों को राहत मिल सकेगी।
जल्द तैयार होगी नई ट्रांसफर नीति
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बातचीत के बाद कहा कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से समझती है। उन्होंने बताया कि नई ट्रांसफर नीति तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री से चर्चा और कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि नीति लागू होने के बाद शिक्षकों के तबादले पारदर्शी और निर्धारित नियमों के तहत किए जाएंगे।
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प्रतिनिधिमंडल से हुई लंबी बातचीत
धरना समाप्त होने से पहले शिक्षकों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव से मुलाकात की। बैठक के दौरान शिक्षकों ने वर्षों से लंबित तबादलों, पारदर्शी स्थानांतरण व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक समस्याओं को विस्तार से रखा। सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जताई।
धरने के दौरान प्रशासन पर लगाए गए आरोप
आंदोलन के दौरान शिक्षकों ने प्रशासन पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। उनका कहना था कि धरना स्थल पर बिजली और पानी की आपूर्ति रोक दी गई थी। इसके अलावा शौचालय बंद होने से विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। शिक्षकों का आरोप था कि इन कदमों के जरिए आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की गई।
राष्ट्रगान गाकर किया था विरोध
धरने के दौरान एक समय स्थिति तनावपूर्ण भी हो गई थी। जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ा तो शिक्षकों ने विरोध दर्ज कराने के लिए राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया। इस अनोखे तरीके ने पूरे आंदोलन को नई पहचान दी और इसकी चर्चा प्रदेशभर में हुई।
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लंबे समय से कर रहे थे तबादलों की मांग
राजस्थान के थर्ड ग्रेड शिक्षक लंबे समय से स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग उठा रहे थे। उनका कहना था कि वर्षों से हजारों शिक्षक अपने परिवार से दूर सेवाएं दे रहे हैं और नियमित ट्रांसफर नीति नहीं होने से उन्हें व्यक्तिगत और पारिवारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अब सरकार के आश्वासन के बाद शिक्षकों ने आंदोलन तो समाप्त कर दिया है, लेकिन उनकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई ट्रांसफर नीति कब तक लागू होती है और उसके आधार पर तबादलों की प्रक्रिया कितनी जल्दी शुरू की जाती है।



